Industry organizations provided health equipment worth 14 crores to the administration in Corona crisis

    औरंगाबाद. गत सवा साल से पूरा देश कोरोना महामारी (corona Pandemic) के संकट से जुझ रहा है। महामारी के इस संकट में गत आर्थिक वर्ष में औरंगाबाद (Aurangabad) के उद्योग व्यवसाय में 15 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद स्थानीय छोटे, मझोले और नामचीन कंपनियों द्वारा कोविड (Covid) से जुझ रहे मरीजों को राहत पहुंचाने सहित सामाजिक दायित्व निभाते हुए करीब 14 करोड़ रुपए के स्वास्थ्य उपकरण और अन्य जरुरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसमें कोरोना (Corona) की दूसरी लहर (Second Wave) में गत दो माह में 9 करोड़ रुपयों की मदद की गई। साथ ही हर दिन 1 हजार से अधिक कामगारों की आरटीपीसी टेस्ट की गई। संकट के इस घड़ी में औरंगाबाद सहित मराठवाडा भर के उद्योगों ने आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए की गई मदद की देश स्तर पर प्रशंसा हुई। बल्कि, नीति आयोग ने भी मराठवाडा के उद्योग संगठनों की मुंह भरकर प्रशंसा की। यह जानकारी भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वाइस चैयरमैन श्रीराम नारायणन, सीआईआई के  महाराष्ट्र कौन्सिल मेंबर मुकुंद कुलकर्णी, सीआईआई के मराठवाडा चैयरमैन रमण अजगांवकर, चेंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (सीएमआईए) के सेक्रेटरी शिवप्रसाद जाजू, मराठवाडा एसोसिएशन ऑफ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज (मसिआ) के वाइस चैयरमैन नारायण पवार, औरंगाबाद फर्स्ट के प्रितेश चटर्जी ने आयोजित प्रेस वार्ता में दी।

    उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उद्योग  संगठनाओं द्वारा 43 वेंटिलेटर, 140 ऑक्सीजन कन्सट्रैटर के अलावा घाटी  अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण किया गया। जिसका उद्घाटन आगामी सप्ताह किया जाएगा। मुकुंद कुलकर्णी ने बताया कि उद्योग संगठनों द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन कन्सट्रैटर का इस्तेमाल मराठवाडा का आदिवासी इलाका किनवट और विदर्भ के हेमलकसा जैसे इलाकों में हुआ। मुकुंद कुलकर्णी ने दावा किया कि उद्योग  संगठनाओं द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वास्थ्य उपकरण आनेवाले 10 सालों तक मेडिकल टूरिजम के लिए राहत भरे साबित होंगे। यह सारी सामग्री उद्योग संगठनाओं ने जिला प्रशासन के माध्यम  से जरुरत के अनुसार उपलब्ध कराई है। सीआईआई के मराठवाडा  वाइस चैयरमैन प्रसाद कोकिल ने बताया कि  जो 43 वैंटिलेटर उपलब्ध कराए गए, उनमें 20 फ्रान्स से, 12 यूएसए से तथा 9 भारत के शामिल है। एक सवाल के जवाब में मुकुंद कुलकर्णी ने बताया कि जो भी स्वास्थ्य  उपकरण उद्योग संगठनों द्वारा अस्पतालों को उपलब्ध कराए गए है, उसकी देखरेख तथा मरम्मत की जिम्मेदारी भी उद्योग संगठनाओं  ने ली है। इन स्वास्थ्य उपकरणों का महत्व कोरोना काल खत्म होने के बाद भी कई सालों तक बरकरार रहें, इस पर उद्योग संगठनों द्वारा विशेष लक्ष्य केन्द्रीत किया जाएगा। जो स्वास्थ्य उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, उसका सारे पार्टस औरंगाबाद में उपलब्ध है, बल्कि उसके टेक्निशीयन भी औरंगाबाद में  कार्यरत हैं। 

     बड़ी संख्या में हुए आरटीपीसीआर व एंटिजन टेस्ट 

    मसिआ के उपाध्यक्ष नारायण पवार ने बताया कि कोरोना महामारी ने पांव पसारने के बाद उद्योगों के कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा था। संकट के इस काल में उत्पादन जारी रखने के लिए कंपनियों में नियमों का पालन कर उत्पादन जारी रखने को तरजीह दी। उत्पादन जारी रखते समय कंपनियों में एक साथ काम करनेवाले कामगारों की आरटीपीसीआर और एंटिजन टेस्ट को प्राथमिकता दी गई। शहर के वालूज व चिकलथाना के अलावा शेन्द्रा एमआईडीसी में उद्योग संगठनों द्वारा हर दिन जिला, मनपा तथा हेल्थ विभाग के सहकार्य से 1 हजार से अधिक कामगारों की आरटीपीसीआर और एंटिजन टेस्टिंग जारी थी। इसके अलावा एमआईडीसी क्षेत्रों में कई वैक्सीन कैम्प आयोजित किए गए। इसका लाभ भी हजारों कामगारों ने उठाकर टीके लगाए। कोरोना महामारी के इस संकट भर काल में लोग ब्लड डोनेशन से कतरा रहे थे, परंतु उद्योग संगठनों द्वारा एमआईडीसी क्षेत्रों में आयोजित किए गए ब्लड डोनेशन कैम्पों को भरपूर प्रतिसाद मिला। इसमें जमा हुआ रक्त जरुरतमंद अस्पतालों को पहुंचाया गया। 

    श्मशान घाटों में उपलब्ध होंगे 5 गैस शव दाहिनी 

    औरंगाबाद फस्र्ट के प्रितेश चैटर्जी ने बताया कि इस संगठन द्वारा उद्योग, व्यापारियों की मदद से शहर के अलग-अलग 5 श्मशानों घाटों में 5 गैस शव दाहिनी उपलब्ध कराए जाएंगे। कोरोना काल में देश के कई शहरों में एक साथ लाशों का अंतिम संस्कार करना टेढी खीर साबित हो रहा है। एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए साढ़े तीन टन लकडि़यों की जरुरत होती है। ऐसे में गैस दाहिनी अंतिम संस्कार के लिए काफी कारगर साबित हो रही है। औरंगाबाद फस्र्ट और उद्योग संगठनों द्वारा कैलास नगर में गैस शव दाहिनी लगाई जा रही है। उसका काम जारी है। आगामी 2-3 माह में शहर के अन्य 4 श्मशान घाटों में गैस शव दाहिनी कार्यरत  होगी। गैस शव दाहिनी खरीदने के लिए हमने प्रयास शुरु करते ही छोटे व मझोले उद्योगों के अलावा बचत गुटों ने हमे मदद की। इस पर चैटर्जी ने उद्योगों की सराहना की। 

    साढ़े चार लाख फूड पैकेट बांटे गए 

    प्रीतेश चैटर्ची ने बताया कि औरंगाबाद फस्र्ट द्वारा कोरोना महामारी के प्रथम लहर में शहर के जरुरत मंदों को साढ़े चार लाख फूडस पैकेट पहुंचाएं गए। गत वर्ष मार्च एंड में अचानक लॉकडाउन घोषित होने के बाद फूड के निर्माण के लिए जरुरी सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही उसे बनाकर जरुरतमंदों तक वितरित करना एक चैलेंज था। हमने उसे स्वीकारते हुए जरुरतमंदों तक साढ़े चार लाख फूडस पैकेट वितरित किए। इसके लिए हमें जिला प्रशासन, पुलिस और मनपा प्रशासन का काफी सहयोग मिला। 

    औरंगाबाद के उद्योजकों को मिला 446 करोड़ का कर्ज 

    एक सवाल के जवाब में मुकुंद कुलकर्णी ने बताया कि गत वर्ष मई माह में केन्द्र सरकार ने कोरोना काल में बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की थी। सरकार की इस घोषणा के बाद औरंगाबाद के छोटे और मझोले उद्योजकों को 446 करोड़ रुपए का कर्ज मिला है।सरकार की घोषणा के बाद प्रथम 3 माह में ही 210 करोड़ रुपए औरंगाबाद के उद्योजकों को वितरित हुए थे। उसका लाभ बड़े पैमाने पर उद्योजकों को हुआ है। उस कर्ज के सहारे उद्योजक अपने व्यवसाय को गति देने में कामयाब रहे। सीआईआई के श्रीराम नारायणन ने बताया कि उद्योजक उनके द्वारा लिए हुए कर्ज की किश्त भी  लौटा रहे है।