holi

    भंडारा. चीनी वायरस कोरोना ने राज्य के अन्य जिलों की तरह भंडारा जिले में भी दस्तक दी. महामारी की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है. रंग पर्व के लिए बाजारों में दूकानें सज गई हैं. पिचकारियां, टोपियां, मुखौडे, रंग-बिरंगे बाल यानि वह सब कुछ जो आमतौर पर होली के मौके पर बाजार में बिकता हुआ दिखायी देता है. गुलाल के पैकेट के छोटे पैकेट 10 रु., पिचकारियां 10 रु. से 500 रु. के रेट में बिकी है. कोरोना महामारी के कारण सुबह 9 से शाम 7 बजे तक ही दूकानें खोलने के आदेश जिला प्रशासन की ओर से दिए गए हैं. इसलिए बाजार में खरीदारों की भीड़ दोपहर 4 से 6 बजे तक ज्यादा ही दिखायी दी. जिला प्रशासन ने लोगों से कोरोना नियमों का पालन करते हुए होली मनाने की अपील की है. साथ ही होली के रंग में भंग न डाले. शराब का सेवन करके शांति व्यवस्था को भंग न करने की अपील की है.

    होली पर्व के बाद ही ग्रीष्मकाल का आगमन होता है. लेकिन इस बार होली दहन से पहले ही लोगों को कड़ी धूप का सामना करना पड़ रहा है. जिस तरह प्रकाश पर्व दीपावली के मौके पर बच्चों ने चुटपुटी तथा अन्य पटाखे खरीदकर पटाखा व्यापारियों को आर्थिक लाभ दिलाया था, उसी तरह रंग पर्व पर पिचकरी खरीद कर बच्चों ने होली से जुड़ी सामग्रियों के दूकानदारों को राहत प्रदान की.   

    वनों में भी दिख रहे विविध रंग

    होली पर्व के कुछ दिनों पूर्व वन में पलास के पेड़ पर खिल फूल मन को आनंदित कर देते हैं. पलास के फूल पांच रंगों के होते हैं, इन रंगों में  गुलाबी, केसरी, लाल, पीले तथा सफेद समावेश है. देश के कुछ हिस्सों में गुलाबी रंग के पलास के फूल खिलने की जानकारी मिली है. होली के पर्व पर पलस के पेड़ों पर खिले रंग मानो यह आभास करा रहे हैं कि वे भी मानव को यह बता रहे हैं कि रंग पर्व का समय आ गया है. बाजारों में सजी रंगों की दुकानें तथा वनों में पलास के पेड़ों खिले रंग बिरंगे फूल प्राकृतिक सुंदरता का जीवंत दर्शन करा रहे हैं.