After elephant, cow injured by eating 'explosive mixed' food, police investigation begins

  • किसान नहीं खरीद पा रहे नई बैल जोड़ियां

अडयाल चिचाल. कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से किए गए प्रयायों के मद्देनज़र बैल बाजार भी बंद रखा गया था. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है. कोंढा के बैल बाजार में गाय, बैल, भैंस की खरीदी बंद होने से किसान न तो बैल खरीद पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं.

विदर्भ में है प्रसिद्ध
विदर्भ के प्रसिद्ध पशुओं के बाजार के कोंढ़ा का बैल बाजार शामिल है. हर वर्ष सभी किसानों तथा पशुपालकों को इस बाजार की प्रतीक्षा रहती है. यह बाजार हर सप्ताह बुधवार को लगता रहा है, लेकिन लॉकडाउन में यह बाजार नहीं खुला है. अभी अनलॉक -1 में भी बैल बाजार शुरू नहीं हुआ है. 

नई फसल के लिए नए बैल जोड़ी खरीदने की परंपरा का पालन करने वाले किसानों को लॉकडाउन में परंपरा को तोड़ना पड़ा है. 

होता है करोड़ों का व्यापार
बैल बाजार में करोड़ों का व्यापार होता है. यहां बिक्री के लिए आने वाली गाय की कीमत 50 से 80 हजार रुपए तक होती है, जबकि भैंस की कीमत 40 से 70 हजार रुपए तक बोली जाती है. यहां पर बहुत से किसान गाय, भैंस का संगोपन करके उसे बिक्री के लिए लाते हैं, लेकिन बाजार बंद होने की वजह से 25 मार्च के बाद से अब तक बैल बाजार नहीं लगा है. 

ठप है खरीदी-बिक्री
बाजार बंद होने के कारण खरीदी बिक्री का व्यवहार पूरी तरह से ठप है. बाजार बंद होने की वजह से खरीदी-बिक्री कराने में अहम भूमिका अदा करने वाले दलालों को रोजी रोटी भी बंद हो गई है. उनके हाथ का काम चले जाने के कारण उन्हें घर में बैठने के अलावा कोई दूसरा रास्ता शेष नहीं बचा है. कोंढ़ा परिसर में गाय, भैंस का व्यापार करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है. वे आसपास के गांव से या जिले से पशुओं को खरीद कर बाजार में बेंचने के लिए लाते हैं. 

नागपुर के व्यापारियों का विरोध
कोरोना संकट काल में कोढ़ा में चोरी-छिपे नागपुर के व्यापारी पशुओं की खरीदी के लिए आए थे. इन पशुओं को बिक्री के लिए लाये जाने की जानकारी जब गांव वालों को मिली तो गांव के किसानों तथा पशुपालकों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जिले के लोगों को खरीदी बिक्री करने के लिए नियमावली तैयार कर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बाजार शुरू करने की मांग की जा रही है.