Pradeep Dive

  • चर्चा के द्वार हमेशा खुले

भंडारा. दिल्ली में चल रहा किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि केवल मोदी विरोध ही है. किसानों की सभी शंकाओं का निराकरण करने की तैयारी दिखाने के बाद भी आंदोलन तथाकथित किसान नेता अपना हठ छोडने को तैयार नहीं है. आंदोलन के आड में कुछ शक्तियां देश में राजनीतिक अराजकता पैदा करने की फिराक में होने का आरोप भाजपा प्रदेश सचिव प्रदीप दीवे ने किया. वे भंडारा में जिला भाजपा द्वारा आयोजित पत्र परिषद को संबोधित कर रहे थे.

प्रदीप दीवे ने आगे कहा कि पंजाब में आंदोलन करनेवाले किसानों से केंद्र सरकार चर्चा कर रही है. लेकिन इन संघटनों ने अचानक दिल्ली पहुंचकर आंदोलन शुरू किया. सरकार ने चर्चा की तैयारी दिखाई. कानून में आवश्यक बदलाव की तैयारी सरकार ने दिखाई है. लेकिन आंदोलनकारी नेता टस से मस होने के लिए तैयार नहीं है.

एमएसपी जारी रहेगी

प्रदीप दिवे ने कहा कि सरकार एवं स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके है कि एमएसपी जारी रहेगी. बाजार समिति व्यवस्था भी जारी रहेगी. इस संबंध में लिखीत आश्वासन देने की तैयारी है.

प्रदीप दीवे ने कहा कि लोकसभा एवं राज्यसभा में बिल पारित होने के बाद बाद 10 अगस्त 2020 को महाराष्ट्र में अध्यादेश जारी हुआ और अब महाआघाडी के नेता विरोध में बात कर रहे है, यह आश्चर्यजनक है. वास्तविकता यह है कि महाराष्ट्र में ठेका खेती यह 2006 से शुरू है. नासिक में अंगूर उत्पादक अपनी फसल शराब निर्माताओं को देते है.

इस तरह पुणे के नारायणगाव में 2000 हेक्टेयर खेती में आलू उत्पादन भी ठेका खेती के माध्यम से होता है. देश में पहला ठेका खेती का करार 2007 में हरियाना में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हुड्डा के कार्यकाल में हुआ था. यह वास्तविकता है. कांग्रेस ने 2019 चुनाव में अपने घोषणापत्र में अत्यावश्यक वस्तु कानून खत्म करने की बात कही थी. अब यही लोग अपनी बात से पलट रहे है.  

पत्रकार परिषद में सांसद सुनिल मेंढे, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप पडोले, जिला महामंत्री मुकेश थानथराटे, मुन्ना फुंडे, हेमंत देशमुख, भाजपा शहर अध्यक्ष संजय कुंभलकर आदि उपस्थित थे.