धान कटाई तथा बंधाई सत्र शुरु

भंडारा. कोरोना महामारी के कहर के बीच वापसी की वर्षा ने किसानों को बहुत परेशान किया है. वापसी की वर्षा के कारण फसलों की कटाई में विलंब हुआ और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में कटाई का काम शुरु हो पाया है. वापसी वर्षा के विराम लेने तथा अक्टूबर हिट के वजह से कड़ी धूप निकलने के कारम किसानों ने फसल कटाई का काम शुरु कर दिया है. किसानों ने हल्की तथा मध्यम प्रजाति के धान की कटाई का काम शुरु कर दिया है. एक ही समय हल्के तथा मध्यम प्रजाति के धान की कटाई करने से किसानों के समक्ष मजदूरों का संकट उत्पन्न  हो गया है. धान कटाई के काम में मजदूरों की किल्लत को ध्यान में रखते हुए कुछ युवकों ने मशीन का उपयोग करके धान कटाई करना शुरु किया है.

चूलबंद नदी घाटी में धान कटाई का काम जोरशोर से जारी है. लेकिन जिस तरह से कटाई का काम हाथ में लिया गया है, उस मद में मजदूर न मिलने के कारण किसानों की परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ गई है. सभी तरफ एक साथ कटाई-बंधाई का काम शुरु होने के कारण मजदूर भी परेशान हो गए हैं. खेती के काम में रूचि न होने के कारण गांव-गांव में युवक व्यवसाय की ओर से बढ़ रहे हैं. आज के तकनीकी युग में मशीन के जरिए काम करना ज्यादा आसान है. हालांकि मानव की तुलना में मशीनी माध्यम से काम करना हर किसान के लिए संभव नहीं है.

लाखनी तहसील के कवलेपाड़ा के दिनेश खंडाईत नामक युवक के मशीनी कटर का प्रयोग करके धान कटाई कर रहे हैं. पालांदूर परिसर में मशीनी से धान की कटाई को बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला है. मजदूरों की कमी पर मशीन से कटाई ही एकमात्र विकल्प है. सरकार की ओर से अनुदान के रूप में विभिन्न मशीनरी तथा कृषि संबंधी सामग्रियां किसानों को मुहैया करायी जाती है. मशीनी से की जाने वाली खेती में कम खर्चा आता है, इस बात को किसान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

पालांदूर परिसर में प्रति हेक्टर चार हजार रूपए धान कटाई का खर्च आता है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रति हेक्टर कटाई खर्च में और वृद्धि होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. वर्षा तथा मौसम के बदलाव के कारण बहुत से स्थान पर धान की फसल नष्ट हो गई. धान काटने में ज्यादा समय लगने की वजह से खर्च भी ज्यादा हो रहा है. आने वाले दो माह धान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं. मौसम बदलने से डरकर बहुत से किसान अधपके धान की कटाई कर रहे हैं.