Bulk pulses became cheaper despite the decrease in arrivals

    खामगांव. केंद्र सरकार ने आयात शुल्क कम करने के साथ ही दाल की आयात को खुला कर दिया है. उसका परिणाम दाल के दामों पर हुआ हैं. सभी दाल के दाम प्रति किलों 2 से 6 रू. तक कम हुए हैं. खाद्य तेल के दाम स्थिर होकर अन्य किराणा माल भी स्थिर हैं.

    लाकडाउन का परिणाम साप्ताहिक किराणा बाजार पर बडे पैमाने पर हो रहा हैं. बाजार समितियां बंद होने से सब्जी की आवक भी बंद थी. कई किसान खुद सब्जी बेचते नजर आए. कई व्यापारी किसानों से मनमानी दामों में सब्जियों की खरेदी कर रहे हैं, लेकिन छोटे बाजार में सब्जियों के दाम कम रहे हैं.

    फलों की आवक भी कम होने से फलों के दामों में तेजी नजर आई है. इस सप्ताह सब्जी, किराणा, बाजार एवं फल बाजार में लॉकडाउन के कारण बड़ा परिणाम हुआ. व्यवहार न होने से छोटे विक्रेताओं को माल मिलने में तकलीफ हो रही है. कोरोना के कड़े प्रतिबंध के कारण कई लोगों के  रोजगार चले गए, जिस कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं. दूसरी ओर लगातार महगाई बढ़ रही है, तो दाल के दाम अब कम होने से कुछ राहत मिली हैं.

    तुअर दाल के दाम 4 रू. से कम

    पूरे सप्ताह भर दुकानें बंद रहने लगी है. जिससे किराणा बाजार में कामकाज बंद होने से वे ठप होने का चित्र नजर आया. इस सप्ताह में केंद्र सरकार ने दाल के आयात खुली करने से दाल के दाम कम हुए.

    सब्जियां नष्ट होनेवाला माल होता हैं. वह समय पर खेत से निकाला कर नहीं बेचा गया तो खेत में ही उसका नुकसान होता हैं. इसलिए जो दाम मिले उस दाम में सब्जियों को बेचने के सिवाए दूसरा रास्ता नहीं रहता है. जिसके कारण हम किसानों ने नुकसान सहन कर जो दाम मिले उस दाम में माल बेचा है.-कल्याणसिंग तोमार, किसान

    लाकडाउन होने से सब्जियां नहीं मिल रही है, ऐसा विक्रेताओं व्दारा बताया जाता हैं. जिस कारण वे जो दाम बोलते हैं उस दामों में सब्जियां खरीदनी पड़ती हैं. कोरोना के कारण आर्थिक संकट हैं, उसी में यह दाम बढ़ने से और दिक्कते बढ़ गई हैं.-सुरेखा पवार, गृहिणी