रेनवाटर हार्वेस्टिंग व वृक्ष संवर्धन के लिए कड़े कानून की आवश्यकता

चिखली. आज पानी के संकट से पूरा देश चिंतित है, इसके लिए हल निकालना हम सभी की जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है, वैज्ञानिकों ने कई मार्ग दिखाये हैं, जिसका उपयोग कर हम आने वाले कल को सुरक्षित रख सकते

चिखली. आज पानी के संकट से पूरा देश चिंतित है, इसके लिए हल निकालना हम सभी की जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है, वैज्ञानिकों ने कई मार्ग दिखाये हैं, जिसका उपयोग कर हम आने वाले कल को सुरक्षित रख सकते हैं.

इंसानों की वजह से ही भारत में बारिश के मौसम में कही बाढ़ तो कहीं सूखा होता है. पर्याप्त बारिश के बावजूद भी लोग पानी के एक-एक बूंद को तरसते हैं, हमने बारिश के पानी का संचय नहीं किया और उसे व्यर्थ में बहाकर दूषित कर दिया. इंसानों की बड़ी गलतफहमी और लालच की वजह से भूजल का अंधाधुंध इस्तेमाल किया, परंतु इसके बचाव के लिये कागज के अलावा प्रत्यक्षरूप में कही प्रामाणिक रूप से आज तक प्रयास नहीं हुआ. हम सूखे की मार से रोने में और सरकार द्वारा इस पर किये जाने वाले प्रयासों को कोस सकते हैं, किंतु इससे निपटने के लिए स्वयं की कोई पहल नहीं करते. हमें पानी के महत्व को समझना ही होगा. बारिश के पानी का संरक्षण कर प्राकृतिक जल स्त्रोत को प्रदूषित होने से बचायें.

वृक्षों का संवर्धन भी जरूरी
आज भी सरकार की ओर से इस समस्या को निपटने हेतु अनेक प्रयास हो रहे हैं, किंतु भ्रष्टाचार और काम से जी चुराने के वजह से यह प्रयास नाकाम होते हुए नजर आता है. बारिश का पानी बचाने और भूजल का स्तर बढ़ाने में पेड़ों का योगदान कई गुणा अधिक ही हैं. एक ओर सरकार पूरी ईमानदारी से पेड़ लगाने के लिये सारी सुविधा, खर्च मुहैया कराती है, उतनी ईमानदारी से काम होते हुए नजर नहीं आते. केवल कागजों पर ही सारी योजनाएं पूरी होकर उस पर ही सारा खर्च हो जाता है. जो निंदनीय है.

…वनसंपदा में भी होगी बढ़ोतरी
नियम है कि, हर नये निर्माण के वक्त वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रयोजन होना ही चाहिये. फिर वो निर्माण चाहे वैयक्तिक हो, सरकारी या अर्ध सरकारी हो. किंतु असल में निर्माण के वक्त हकीकत में वॉटर हार्वेस्टिंग प्रयोजन हुआ या नहीं? यह जानने के लिये संबंधित विभाग का कोई कर्मचारी या अधिकारी इस पर नजर रखने के लिये नहीं जाते. इस बात को शायद वह महत्व नहीं देते हैं. आज देश में सभी ओर निर्माण के वक्त वॉटर हार्वेस्टिंग पर ईमानदारी से काम हो जाये और वनसंपदा में भी बढ़ोतरी हो जाये तो यकीनन धरती के भीतर का जलस्तर बढ़ेगा ही. इसके लिये जागरूक अधिकारी और कर्मचारियों समेत कड़े कानून की आवश्यकता है. चिखली नगर पालिका की बात की जाये तो यहां विषय में एक नया खुलासा सामने आया है. वह यह कि, बिल्डिंग परमिशन देते वक्त रेन हार्वेस्टिंग कंपलसरी है, मगर इस पर कारवाई या अमल हेतु किसी प्रकार की कार्यप्रणाली आजतक मौजूद नहीं.

सभा में रखेंगे प्रस्ताव
◆ यह सच है कि इस विषय में आज तक किसी तरह का प्रस्ताव पारित नहीं है. मगर हम आने वाले मीटिंग में इस विषय को प्राथमिकता देकर प्रस्ताव पारित करेंगे. लोगों से इस विषय में आह्वान भी करेंगे. जो लोग खुद होकर यह करना चाह रहे होंगे उन्हें नगरपालिका की ओर से जेसीबी तक उपलब्ध कराएंगे- अभिजीत वायकोस, मुख्याधिकारी, नगर परिषद चिखली.

लोगों को जागरूक करें
बारिश का पानी प्रकृति की अनमोल देन है. बिना किसी भेदभाव के हमें वह प्राप्त होता है. भूजलस्तर दिन ब दिन कम होते चले जाना यह आज के समय में एक बहुत गम्भीर प्रश्न है. रेनवाटर हार्वेस्टिंग का काम ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, चीन, इजराइल जैसे देशों में काफी समय से सफलता पूर्वक हो रहा है. हमारे यहां पर नागरिकों को इस विषय में जागरूकता पूर्वक कम से कम अपने आंगन और छत के बारिश का पानी अपने ही जमीन में रेन हारवेस्टिंग द्वारा रिझाना अत्यंत जरूरी है, जिससे हमारा आने वाला कल सुरक्षित हो सके- चंद्रेशकुमार शर्मा, सिविल इंजीनियर एंड कंसल्टेंट