Crop Damage
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    आसेगांव. 14 जुलाई की रात 8 बजे के दौरान शुरू हुई धुआंधार बारिश ने मूसलाधार बारिश के रूप में उग्र रूप धारण कर लेने से आसेगांव परिसर के नदी नाले देर रात तक उफान पर रहे. डेढ़ घंटे तक बिजली की कड़कने के साथ हुई जोरदार बारिश ने नदी किनारें के सैंकड़ों हेक्टेयर की खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया है. किसानों ने सरकार द्वारा नुकसानग्रस्त खेतों का सर्वेक्षण कर मुआवजा देने की मांग की है.

    उल्लेखनीय है कि बीते चार दिनों से कभी रिमझिम तो कभी धुआंधार बारिश का सिलसिला आसेगांव समेत परिसर में लगातार जारी रहने से खेतों में खड़ी खरीफ की फसलों को नव संजीवनी मिली थी. जिस कारण किसानों के मुरझाते हुए चहरों पर मुस्कान लौट आई थी. बीते 11 जुलाई से बारिश का सिलसिला लगातार कभी रिमझिम तो कभी धुआंधार बारिश के रूप में जारी था.

    किंतु 14 जुलाई की रात 8 बजे से रिमझिम बारिश ने मूसलाधार बारिश का रूप धारण कर तबाही मचाने का कार्य किया. और लगभग डेढ़ घंटे से अधिक समय तक बारिश का तेज कहर जारी रहा. इस मूसलाधार बारिश के कहर से ग्रामों से पानी निकासी के लिए भी रास्ते नही बच पाए थे.

    आसेगांव समेत अनेक गांव के आधे से अधिक घरों में बारिश का पानी भी जमा रहा. लोगों ने भारी मशक्कत कर पानी को घरों से बाहर निकालने में घंटो बाद सफलता पाई. नदी नालों का तेज बहता जल खेतों से बहने के कारण किनारे के खेतों की खड़ी फसलें व मिट्टी बह गई. इतना ही नही सिंचाई बांध, खेत तालाब, खेत कुओं में बड़ी मात्रा में जलसंग्रह बढ़ा है.

    फसलों के नुकसान होने की जानकारी प्राप्त होते ही राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पटवारियों को सर्वेक्षण के लिए भेजने की जानकारी है. आसेगांव समेत परिसर के जिन ग्रामों के खेतों का नुकसान हुआ है़  उनमें चिंचखेडा, नांदगांव, शिवनी, आसेगांव, चिंचोली, दाभडी अनेक गांव के खेतों का समावेश है. 

    पहले सुखे ने तरसाया अब गीले की भी मार 

    25 जून से बारिश पूरी तरह से नदारद रहने के कारण खेतों की खड़ी खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थी. जिससे किसान हताश हो गए. लेकिन 14 दिनों के अंतराल के बाद बारिश होने से फसलों को जीवनदान मिला लेकिन अब जोरदार बारिश व भारी वर्षा ने किसानों की फसलों को हानी पहुंचाई है़.