कोविड-19: हेटरो ने बनाई रेमडेसिविर की पहली जेनेरिक दवा

‘कोविफॉर’ ब्रांड नाम से बेचने की मंजूरी

मुंबई. भारतीय जेनरिक फार्मा कंपनी हेटरो लैब ने कोविड-19 के इलाज के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से इन्वेस्टिगेशनल ऐंटीवायरल दवा ‘रेमडेसिविर’ के विनिर्माण और विपणन की अनुमति प्राप्त कर ली है. हेटरो द्वारा निर्मित रेमडेसिविर का जेनेरिक संस्करण भारत में ‘कोविफॉर’ ब्रांड नाम के तहत बेचा जाएगा. अमेरिकी कंपनी गिलीड द्वारा विकसित ‘रेमडेसिविर’ कोविड-19 के गंभीर लक्षणों वाले रोगियों के उपचार में कुछ हद तक प्रभावी मानी जा रही है. इसका मूल्य करीब 5500 रुपए रखा गया है. आयात की तुलना में यह भारत में सस्ती रहेगी. इसका विपणन सरकार के माध्यम से ही किया जाएगा. एक अन्य भारतीय कंपनी ग्लेनमार्क ने कोविड-19 के हल्के लक्षणों वाले रोगियों के लिए ओरल एंटीवायरल ‘फैविपिराविर’ का जेनेरिक संस्करण भारत में ‘फैबिफ्लू’ के नाम से शनिवार को ही लांच किया है, जिसका मूल्य प्रति टैबलेट 103 रुपए है.

सकारात्मक क्लीनिकल परिणाम

हेटरो ग्रुप के चेयरमैन डॉ. बी. पार्था सराधी रेड्डी ने कहा कि भारत में बढ़ते कोविड-19 मामलों के मद्देनज़र कोविफॉर (रेमडेसिविर) अपने सकारात्मक क्लीनिकल परिणामों के चलते गेम चेंजर साबित हो सकती है. मजबूत बैकवर्ड इंटिग्रेशन क्षमताओं के साथ हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह उत्पाद देश भर के मरीजों को तत्काल मुहैया कराया जा सकता है. वर्तमान जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के लिए हम तैयार हैं. कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में हम सरकार और चिकित्सा समुदाय के साथ मिलकर काम करते रहेंगे. इस उत्पाद को ’मेक इन इंडिया’ मुहिम के मुताबिक बनाया गया है.

कोरोना के गंभीर लक्षणों में प्रभावी

‘रेमडेसिविर’ को डीसीजीआई ने उन बच्चों एवं व्यस्कों के उपचार के लिए स्वीकृति दी है, जो कोविड-19 के गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्हें कोविड-19 होने की शंका है या फिर प्रयोगशाला से इस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है. कोविफॉर 100 मिली ग्राम की शीशी (इंजेक्टेबल) में उपलब्ध रहेगी. जिसे अस्पताल में डॉक्टर की निगरानी में इंट्रावीनसली दिया जाएगा. इस दवा को गिलीड साइंसिस इंक. के लाइसेंसिंग ऐग्रीमेंट के तहत लांच किया गया है, ताकि निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में कोविड-19 के इलाज का विस्तार किया जा सके.