Stop Worrying and Start Investing Amit Grover

  • धैर्यवान निवेशक ही होता है सफल, अस्थिरता से ना हो विचलित

मुंबई. निवेश विशेषज्ञ और DSP इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के एवीपी (लर्निंग एंड डेवलपमेंट) अमित ग्रोवर ने कहा है कि पिछली सदी तक निमोनिया, टीबी और डायरिया सबसे जानलेवा बीमारियां मानी जाती थी, परंतु अब अधिकांश लोग तनाव और जीवन शैली से संबंधित बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। तमाम रिसर्च बताते हैं कि वित्तीय चिंता (Financial Stress) यानी पैसे की तंगी भी तनाव  का एक सबसे बडा़ कारण बन गया है। आज की तारीख में आपको बहुत से लोग यह कहते मिल जाएंगे कि हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि खुश रहने पर ही आप चिंता या तनाव मुक्त हो सकते हैं। परंतु क्या हमेशा खुश रह पाना मुमकिन हैं? नहीं। आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए, हमेशा खुश नहीं रह सकते हैं। जिंदगी में सुख-दुख और उतार-चढ़ाव आना तय है। यहीं इक्विटी यानी शेयर बाजार (Stock Market) में भी होता है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव कोई चाहकर भी नहीं रोक सकता है। बाजार अलग-अलग फैक्टर पर निर्भर होता है। घटनाओं पर रिएक्ट करता है। इसलिए अस्थिरता यानी उतार-चढ़ाव (Ups and Downs) शेयर बाजार का स्वभाव है। वैसे यह बात सभी बाजारों पर लागू होती है। हालांकि शेयर बाजार ज्यादा चंचल होता है।

निवेश विशेषज्ञ अमित ग्रोवर का कहना है कि कभी-कभी हमारा मन हमें वो संकेत देता है, जो आंकड़ें नहीं दे पाते हैं। हमेशा सफलता नहीं मिल सकती है, फायदा हमेशा नहीं हो सकता है। कभी नफा तो कभी नुकसान होना ही है। ना तो कोई बिजनेसमैन हमेशा सफलता प्राप्त कर सकता है और ना ही अब तक सफल रही कोई कंपनी चाह कर भी आगे लगातार सफलता प्राप्त कर सकती है। वैसे ही कोई निवेशक चाहकर भी हमेशा सफल नहीं हो सकता है। कितना भी माहिर क्यों ना हो, कभी ना कभी तो उसे भी असफलता हाथ लगती ही है।

डर में तब्दील हो जाती है भावुकता

बिजनेस की दुनिया में हर रोज नए खिलाड़ी जन्म लेते हैं और नए विजेता घोषित होते हैं। परंतु एक आम निवेशक एक संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो में निवेश कर अपनी चिंता कम कर सकता है। बाजार में निवेश सलाहकार अक्सर यह कहते रहते हैं कि आपको तब लालची (Greedy) होना चाहिए। जब बाकी सब डर रहे हों। और इक्विटी (Equity) में तब निवेश करना चाहिए, जब बाजार में खून बिखरा हुआ हो, यानी घोर मंदी हो। लेकिन यह कर पाना एक तरह से नामुमकिन होता है। हमारा मन भावुक (Emotional) होता है और यह भावुकता डर (Fear) में भी तब्दील हो जाती है। इसलिए हमारे पोर्टफोलियो (Portfolio) में फिक्स इनकम और सही एसेट अलोकेशन (Right Ssset Allocation) का संतुलन होना जरूरी है। 2020 ने हमें बता दिया कि भविष्य हमेशा अनिश्चित होता है, इसलिए हमें पोर्टफोलियो में स्टॉक (Stocks) और बॉन्ड (Bonds) का संतुलन रखना चाहिए।

इक्विटी में मुद्रास्फीति को मात देने की क्षमता

अपने लिए घर खरीद कर अगले 20 साल तक होम लोन की मासिक किस्त (EMI) चुकाना या फिर हमेशा किराए के घर में रहना, यह एक निजी सवाल है। पर्सलन फाइनेंस में (Personal Finance), सबके लिए एक जैसी रणनीति उपयुक्त नहीं हो सकती है। कोई 80 साल की आयु का बुजुर्ग व्यक्ति अपने पोर्टफोलियो का अधिकांश निवेश उच्च जोखिम वाले एसेट क्लास में करना पसंद कर सकता है। तो दूसरी तरफ एक 30 साल का युवा व्यक्ति अपना अधिकांश निवेश सुरक्षित पोर्टफोलियो में रखना पसंद करता है। इसलिए हमें चिंतामुक्त पोर्टफोलियो बनाने के लिए पहले अपनी भावी जरूरतों के अनुसार अपने वित्तीय लक्ष्यों का निर्धारण कर लेना चाहिए। तभी हम एक अच्छा निवेश पोर्टफोलियो बना सकते हैं।  

भूतकाल का रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं

आम निवेशक अक्सर किसी स्टॉक या एसेट क्लास में पिछले वर्षों के रिटर्न (Historic Returns) को आधार मानकर भविष्य में भी उतने ही रिटर्न की उम्मीद में निवेश कर डालते हैं, लेकिन यह गलत निर्णय हो सकता है, क्योंकि इसकी कोई गारंटी नहीं होती कि किसी भी एसेट क्लास में पिछले दशक का प्रदर्शन यानी रिटर्न अगले दशक में भी रिपीट होगा। हर दौर अलग होता है। हर बार नए जोखिम आते हैं और नए रिटर्न मिलते हैं। परंतु इक्विटी ऐसा एसेट क्लास है, जिसमें किसी भी दशक में निगेटिव रिटर्न नहीं रहा। जब लंबे समय तक ब्याज दरें निचले स्तरों पर रही हैं और भविष्य अनिश्चित रहा है। तब इक्विटी ने ही बेहतर रिटर्न प्रदान कर महंगाई को मात दी है। क्योंकि इक्विटी में मुद्रास्फीति (Inflation) को मात देने की क्षमता होती है। इसलिए हमें हमारे प्लान खराब या कम रिटर्न को मानकर बनाने चाहिए, इससे हमारी उम्मीदें कम रहेंगी तो चिंता भी कम होगी।

  • कार एक आशावादी इंसान ने बनाई है तो उसमें सीट बेल्ट एक निराशावादी इंसान ने बनाई है। स्टॉक मार्केट में भी आम निवेशक को कई तरह की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। जैसे नौकरी छूटना, मार्केट में भारी गिरावट आना, बीमार पड़ना या फिर लंबी मंदी का दौर आना। इसलिए इन सभी तथ्यों और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखेंगे तो हम अधिक बचत और अधिक निवेश कर सकेंगे। तभी निवेश पर रिटर्न में ग्रोथ के साथ धीरे-धीरे वेल्थ क्रिएट हो सकेगी।
  • अध्ययन से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि मार्केट रिटर्न और क्लाइंट पोर्टफोलियो रिटर्न में बहुत बड़ा अंतर रहता है। अनेक निवेशक मार्केट में ‘टिप’ के सहारे इंडेक्स से अधिक रिटर्न हासिल करने की कोशिश में जुटे रहते हैं, लेकिन जब मार्केट तेजी से गिरने लगता है तो अंत में नुकसान ही उठाते हैं। यदि आपको इंडेक्स से ही अधिक रिटर्न प्राप्त करना है तो पैसिव या एक्टिव म्युचुअल फंडों (Mutual Funds) में निवेश कर चिंतामुक्त होकर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

सफलता के लिए ‘इमोशनल इंटेलीजेंस’ जरूरी

इक्विटी बाजार में एक और सबसे अहम बात यह है कि यहां रिटर्न प्राप्त करने के लिए निवेशक को अपने इमोशन यानी भावनाओं पर नियंत्रण करने में सक्षम होना चाहिए। विश्व प्रसिद्ध लेखक डेनियल गोलमैन (Daniel Goleman) ने अपनी पुस्तक ‘इमोशनल इंटेलीजेंस’ (Emotional Intelligence) मे लिखा है कि जीवन में 80 प्रतिशत सफलता इमोशनल इंटेलीजेंस की वजह से ही मिलती है। बाजार में उतार-चढ़ाव यानी अस्थिरता तो लगातार आती रहती है, लेकिन यह अस्थिरता ही निवेशक की बार-बार परीक्षा लेती है। जो निवेशक अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखकर अस्थिरता में विचलित नहीं होता है, वह अच्छा फायदा हासिल कर लेता है और जो निवेशक अस्थिरता में धैर्य नहीं रख पाता है और निराशा का शिकार हो जाता है, वह नुकसान में ही रहता है। इमोशनल इंटेलीजेंट यानी धैर्यवान निवेशक ‍‍दशकों तक अपने पोर्टफोलियो को नहीं छूते हैं और वे ही बड़ी कमाई कर अच्छी वेल्थ बनाने में कामयाब होते हैं।