Tiger made cow morsel

  • वनविभाग की बाघ को पकडने की कवायद

चंद्रपुर. चंद्रपुर जिले के राजुरा तहसील में पिछले एक वर्ष से नरभक्षी बाघ ने आतंक मचा रखा है। इस बाघ ने अब तक यहां सात ग्रामीणों को अपना निवाला बनाया है। 26 सिंतबर को इस नरभक्षी बांघ ने मध्यचांदा वन विभाग अंतर्गत विरूर वन परिक्षेत्र में नियत क्षेत्र कक्ष क्र.145 में नवेगांव के गोविंदा भीमराव मडावी (70) नामक किसान को अपना शिकार बनाया। आरटी 1 नामक से चिन्हित इस बाघ ने राजुरा तहसील के विरूर वनपरिक्षेत्र में अपना डेरा डाल रखा है और पिछले नवंबर से लेकर अब तक सात लोग उसका शिकार हुए है। तब से अब तक बाघ को पकडने के भरसक प्रयास किए गए परंतु वनविभाग को किसी तरह की सफलता नहीं मिला है। इसके चलते ग्रामीणों में काफी रोष है।

वर्ष 2018-19 में ब्रम्हपुरी में नरभक्षी बाघ की दहशत कायम थी जिसे आखिरकार शूटर के माध्यम से मार गिराना पड़ा था। वर्ष 2019-20 में राजुरा तहसील में बाघ की जबदस्त दहशत है। इस नरभक्षी बाघ को पकडने के लिए वनविभाग ने विभिन्न पथक तैयार कर तैनात किए है। ग्रामीणों के बढते रोष को देखते हुए स्वयं वरिष्ठ अधिकारी भी फिल्ड पर उतर आये है।

इस नरभक्षी बाघ ने अब तक सात लोगों को अपना निवाला बनाया है इसमें 25 नवंबर को मूर्ति सालवे, 25  दिसंबर को चिचबोडी के मंगेश कोडापे, 4  जनवरी को संतोष खामनकर, 18  जनवरी को जोगापुर की वैशाली तोडासे, 6 मार्च को चुनाला के उध्दव टेकाम, 18 अगस्त को नवेगांव के वासुदेव कोंडेकर और 26 सितंबर को नवेगांव के गोंविदा मडावी को अपना शिकार बनाया है।

इस परिसर में बाघ की इस कदर दहशत है कि किसान खेतों में जाने से डर रहे है। खेतों में विरानी छायी हुई है। पशुपालकों ने अपने जानवरों को गोशालाओं में बांध रखा है। इस नरभक्षी बाघ को पकडने के लिए इससे पूर्व दो बार आदेश जारी हुआ और तैयारी भी की गई परंतु कुछ भी सफलता हाथ नहीं लगी। नवेगांव की ताजा घटना के बाद से ग्रामीणों में काफी रोष है सभी ग्रामीण बाघ को मार गिराने की मांग कर रहे है। इसके चलते बाघ को पकडने की मुहिम तेज हो गई है। बाघ को पकडने के लिए प्रयास शुरू होने की जानकारी विभागीय अधिकारी अरविंद मुंडे ने दी।