कोरोना काल में देश भर में क्यों घूम रहे राष्ट्रपति

    जनता को कोरोना महामारी (Coronavirus) के चलते कहा जाता है कि सुरक्षा नियमों का पालन करें, जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, घर से बाहर न निकलें लेकिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) कोरोना काल में लगातार देश भर में घूम रहे हैं. क्या जनता के लिए नियम अलग हैं और राष्ट्रपति एवं राजनेताओं के लिए कुछ अलग किस्म का कायदा है? अभी राष्ट्रपति ने 3 दिन का ओडिशा (Odisha)दौरा किया और भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) में जाकर पूजा-अर्चना की. इसके पहले भी वे देश के विभिन्न स्थानों में लगातार भ्रमण करते रहे हैं.

    जनसामान्य को लगता है कि आखिर कोरोना आपदा के समय राष्ट्रपति क्यों देश भर में इतना घूम रहे हैं जबकि वे सीनियर सिटिजन की आयु सीमा में आते हैं. संक्रमण के समय इस तरह घूमना कितना निरापद है? मान लिया जाए कि राष्ट्रपति खुद तो सुरक्षित हैं परंतु उनके दौरे के समय व्यवस्था करने वालों को भी तो कोरोना हो सकता है. कितने ही राज्य सरकार के नेता, उच्च प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी व समूची व्यवस्था का राष्ट्रपति के दौरे के समय अत्यंत सक्रिय होना पड़ता है. राष्ट्रपति आएं तो राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भी फिक्र करनी पड़ती है. वे तो साथ रहते ही हैं, राज्य से ताल्लुक रखने वाला केंद्र का कोई मंत्री व अन्य लोग भी साथ रहते हैं.

    ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसी तरह यह भी आश्चर्यजनक है कि जिन राज्यों में चुनावी रैली हो रही है वहां हजारों लोग बगैर मास्क लगाए मौजूद रहते हैं अपनी पार्टी के लिए वोट मांगने वाले ये नेता क्या जनता के स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाल रहे? क्यों नहीं वे रैली में उपस्थित लोगों से अनिवार्य रूप से मास्क पहनने की अपील करते? वे रैली के पहले वहां आनेवालों के लिए मुफ्त मास्क उपलब्ध करवा सकते हैं. रैली में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं. इसके अलावा हरिद्वार में कुंभ मेला होने जा रहा है जहां लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथसिंह रावत ने पूर्व सीएम का वह फैसला बदल दिया जिसमें श्रद्धालुओं को कोविड निगेटिव प्रमाणपत्र साथ लेकर आने को कहा गया था. क्या ऐसे रवैये से कोरोना और नहीं फैलेगा?