आरामदेह सफर के लिए प्राइवेट ट्रेन बन रही यात्रियों की पसंद

    रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) का तर्क समय के साथ है कि जब सड़कों पर निजीवाहन चल सकते हैं तो पटरियों पर प्राइवेट ट्रेन क्यों नहीं चल सकतीं? उनकी दलील है कि सड़कें भी तो सरकार बनाती है तो क्या कोई कहता है कि इस पर केवल सरकारी गाड़ियां चलेंगी. रेलमंत्री ने रेलवे (Indian Railways) की पटरियों पर प्राइवेट सेक्टर की ट्रेनों को दौड़ाने की योजना का बचाव करते हुए यह बात कही. यह तथ्य है कि 1956 में रेलवे का राष्ट्रीयकरण होने के पहले तक भारत में निजी कंपनियों की ट्रेनें चला करती थीं.

    जीआईपी (ग्रैंड इंडियन पेनिनसुला) (Great Indian Peninsular) व बीएनआर (बंगाल-नागपुर रेलवे) ऐसी ही निजी कंपनियां थी. एक ब्रिटिश कंपनी किलिक निकसन की शकुंतला नामक मीटर गेज ट्रेन विदर्भ के कपास उत्पादक क्षेत्रों में चला करती थी. बाद में यह ट्रेन बंद कर दी गई. राष्ट्रीयकरण के बाद बीएनआर का रूपांतरण दक्षिण पूर्व रेलवे में हो गया. पुरानी ट्रेनें भाप या स्टीम इंजिन से चला करती थीं. फिर डीजल और बाद में विद्युत चालित ट्रेनों का प्रचलन हुआ. अब यात्री अधिक सुविधाजनक व आरामदेह ट्रेन यात्रा पसंद करते हैं. ‘तेजस’ भारत की पहली ट्रेन है जो निजी आपरेटर्स द्वारा चलाई जा रही है. आईआरसीटीसी द्वारा संचालित लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस का उद्घाटन 4 अक्टूबर 2019 को हुआ था.

    अहमदाबाद-मुंबई तेजस एक्सप्रेस (Tejas Express) भी आईआरसीटीसी चलाती है. मुंबई से गोवा के लिए और चेन्नई से मदुरै के लिए भी तेजस ट्रेन चलती हैं. तेजस ट्रेन में 14 नान एक्जीक्यूटिव चेयरकार हैं जिनमें प्रत्येक में 72 यात्री बैठ सकते हैं. इसके अलावा 2 एक्जीक्यूटिव चेययरकार भी है जिनमें 56 यात्री बैठ सकते हैं. ऐसी निजी ट्रेन, के कोच में बायो वैक्यूम टायलेट, टेपसेंसर, हैंड ड्रायर, हर यात्री के लिए एलईडी टीवी वाई-फाई, चाय काफी वैडिंग मशीन, जाने माने शेफ द्वारा तैयार मनपसंद खाना, सीसीटीवी कैमरा आदि हवाई जहाज जैसी तमाम सुविधाएं है. तेजस का किराया शताब्दी के किराए से 20 से 30 फीसदी ज्यादा है. ट्रेन चलते ही स्वचालित दरवाजे अपनें आप बंद हो जाते हैं. इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन की अधिकतम गति 200 किमी प्रति घंटा है. जो लोग ज्यादा किराया देकर, आनंददायी सफर चाहते हैं वे निजी ट्रेन पसंद करेंगे.