बाबा आमटे की पोती की खुदकुशी दुर्देवपूर्ण

स्व. बाबा आमटे (Baba Amte) व उनके परिवार का कुष्ठ रोगियों की सेवा में महान योगदान कौन नहीं जानता! उनके त्याग और तपस्यामय जीवन की देश-विदेश में ख्याति रही है. इसी परिवार की एक सदस्य और बाबा आमटे की पोती डा. शीतल आमटे-करजारी (Sheetal Amte) की आत्महत्या दुर्देवपूर्ण व स्तब्ध कर देने वाली है. सहज प्रश्न उठता है कि ऐसे सुशिक्षित व जाने माने सेवाभावी परिवार की डाक्टर युवती ने खुदकुशी क्यों की? ऐसा कौन सा तनाव या अवसाद था जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने हाथ में जहर का इंजेक्शन लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली? यह सारे प्रश्न रहस्यमय और अनुत्तरित हैं.

आत्महत्या के समय शीतल आमटे के पिता डा. विकास आमटे और मां भारती आमटे हेमलकसा में थे जहां वे लोक बिरादरी का काम देखते हैं. डा. शीतल आमटे-करजारी महारोगी सेवा समिति की सीईओ के रूप में काम कर रही थीं. 20 नवंबर को शीतल आमटे ने फेसबुक लाइव पर आमटे परिवार के सदस्यों के संबंध में गंभीर आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया था लेकिन आधे घंटे बाद उन्होंने इसे सोशल मीडिया से हटा लिया था. इसके बाद आमटे परिवार के प्रमुख सदस्यों ने पत्रक जारी कर डा. शीतल आमटे की मन:स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी.

इस तरह परिवार में गृहकलह शुरू थी. आत्महत्या के समय आनंदवन में शीतल, उसके पति व ससुर मौजूद थे. अपनी मृत्यु के पहले डा. शीतल ने अपने टि्वटर अकाउंट पर ‘वार एंड पीस’ शीर्षक की पेंटिंग पोस्ट की थी. शीतल की आत्महत्या से उनके पति गौतम, पुत्र शर्विल तथा आमटे परिवार को भारी आघात पहुंचा है. वह एक प्रतिभाशाली व गुणी महिला थीं. 1979 में जन्मी शीतल ने 2003 में नागपुर शासकीय मेडिकल कालेज से एमबीबीएस किया. उन्होंने हेमलकसा, आनंदवन व सोमनाथ की संस्थाओं में वित्त नियोजन किया. उन्हें 40 वर्ष से कम उम्र में किए गए कार्यों के लिए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने मार्च 2016 में यंग ग्लोबल लीडर के रूप में सम्मानित किया था. अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से उन्होंने लीडरशिप का पाठ्यक्रम पूरा किया था.

मेडिकल लीडरशिप क्षेत्र में लैन्सेट कमीशन ऑन ग्लोबल सर्जरी के साथ डा. शीतल ने मशाल और चिराग नामक 2 कार्यक्रम शुरू किए थे. वे अपने पितामह बाबा आमटे के सामाजिक कार्य की विरासत संभाल रही थीं. उन्होंने आनंदवन को स्मार्ट विलेज बनाने का प्रयास किया था तथा दिव्यांगों के लिए ‘निजबल’ और बेरोजगारों के लिए ‘युवाग्राम’ उपक्रम शुरू किए थे. पर्यावरण संरक्षण के लिए भी वे सक्रिय थीं. ऐसे रचनात्मक कार्य करने वाली मिलनसार स्वभाव की डा. शीतल की आत्महत्या रहस्यमय होने के साथ ही अत्यंत दुखद भी है जिससे राज्य में शोक व्याप्त है.