बासमती के अलावा, चावल की यह किस्में भी होती हैं बेहद सुगंधित और स्वादिष्ट

ऐसा शायद ही कोई घर होगा जहाँ चावल (Rice) न बनता हो। साउथ इंडिया में तो ज़्यादातर चावल ही बनाया जाता है। वहीं बहुत से लोग इसे खाने के बेहद शौकीन भी होते हैं। भारत की लंबे चावल की एक उत्कृष्ट किस्म है बासमती, यह अपने सुगंध के लिए बेहद प्रसिद्ध है। भारत में 6 हज़ार से भी ज़्यादा चावल की किस्में उगाई जाती हैं। बासमती के अलावा भारत में आज भी कई ऐसे चावल है जो अपने स्वाद की वजह से अलग पहचान रखते हैं। तो आइए जानते हैं कौन से हैं वह चावल…

मुल्लन कजहामा-
मुल्लन कजहामा चावल की यह किस्म दक्षिण राज्य केरल के वायनाड में उगाई जाती है। यह अपनी सुगंध और टेस्ट के लिए काफी मशहूर है। इन चावलों से बनी मालाबार बिरयानी और पाल पायसम खाने में बहुत ही टेस्टी होती है। 

गोबिंदो भोग-
गोबिंदो भोग चावल देश-विदेश में बेहद प्रसिद्ध है। यह आकार में छोटे होते हैं, साथ ही बहुत सफ़ेद और सुगंधित भी होते हैं। इन चावल का ज़्यादातर इस्तमाल पूजा-पाठ, प्रसाद और त्यौहारों में किया जाता है। इस चावल की खेती अधिकतर पश्चिम बंगाल में की जाती है। 

सीरगा सांबा-
सीरगा सांबा दक्षिणी भारत का पारंपरिक चावल है। यह दक्षिणी भारत का पारंपरिक चावल है। इसकी कई किस्में हैं। सरेगा मुथु और सीरगा साम्बा, यह दोनों सुगंधित चावल हैं। यह चावल आकार में लंबा और बहुत खुशबू वाला होता है। चावल की इस किस्म को विशेषकर पुलाव बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। 

अम्बेमोहर चावल-
अम्बेमोहर चावल जल्दी पकने वाला चावल है। यह बेहद मुलायम होता है और इसी कारण यह आसानी से टूट भी जाता है। यह अपनी आम के बौर जैसी तेज खुश्बू के लिए बहुत प्रसिद्ध है।