तहसील में बीएसएनएल, बिजली विभाग की अनियमित सेवा

  • सेवा के नाम पर नागरिकों की लूट

कोरची. वर्तमान विज्ञान और तकनीकी के युग में नेटवर्क व बिजली यह भी मानव की जीवनाश्यक जरूरते बन गई है। एक ओर केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया का उपक्रम चला रही है, वहीं जिले के उत्तरी छोर में बसे कोरची तहसील में मात्र इन डिजिटल इंडिया से कुछ लेना देना नहीं ऐसा प्रतीत हो रहा है। तहसील के संपर्क का एकमात्र साधन  बीएसएनएल व बिजली सुस्त सेवा नागरिकों के लिए सिरदर्द बन रहा है। 

कोरची यह तहसील मुख्यालय तथा नगर पंचायत होने के बावजूद आजादी के 73 वर्ष बाद भी तहसील की प्रगति से कोसों दूर है। कोरोना लॉकडॉऊन के बाद दुकाने तो शुरू हुई मात्र मोबाइल बिक्री व मरम्मत, इलेक्ट्रीक दुकाने, जेरॉक्स, ऑनलाईन क्लासेस ऐसे अनेक दुकानदारों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड रहा है। अचानक समय समय पर होनेवाले ट्रिप के कारण महंगी मशीनों पर प्रतिकूल परिणाम पड रहा है। इस क्षेत्र के अधिकत्तर क्षेत्र में यातायात के साधन नहीं होने से जनता को कार्यालयीन कार्य के लिए तहसील में पैदल की आना पडता है। बिजली खंडित समस्या से उन्हे निराश होकर लौटना पडता है। नाम के लिए सेवा होने के बावजूद बिजली बिल मात्रा भारी भरकम आ रहा है। तहसील यह वनसमृद्ध होने से बिजली की समस्या निर्माण होने की बात कहीं जा रही है। मात्र तकनीकी ज्ञान का उपयोग कोरची तहसील के लिए नहीं क्या? ऐसा सवाल नागरिकों के मन में निर्माण हो रहा है। 

कोरची तहसील में बीएसएनएल यह एकमात्र विकल्प होकर नागरिकों को मिलनेवाले सेवा के नाम पर केवल खुली लूटमार हो रही है। सेवा के नाम पर ग्राहकों से पैसे वसुले जा रहे है, मात्र सेवा नाममात्र है। वहीं संपर्क के नाम पर बीएसएनएल विभाग के केवल बहाने बता रहा  है। बिजली व बीएसएनएल इन दोनों सेवा के कार्य के प्रति रोष व्यक्त करते हुए कुछ दिन पूर्व सर्वदलीय कार्यकर्ताओं ने चक्काजाम आंदेालन किया था। मात्र इसका कुछ भी परिणाम नहीं होने का संबंधित दोनों विभाग के कार्यो को लेकर दिखाई दे रहा है।