सरकार दे रहा ‘आवास’, प्रशासन छीन रहा ‘निवास’

  • रेत के अभाव से घरकुल निर्माण अधर में

गडचिरोली. सरकार द्वारा गरीबों के झोपडों को पक्के मकानों में परिवर्तीत करने व उनका जीवनस्तर ऊंचा करने के उद्देश से प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है। इस योजना के माध्यम से अनेक गरीब लाभार्थियों को आवास मंजूर किए जा रहे है। किंतु दूसरी ओर सरकार के मंजूरी के अभाव में गरीबों के आशियाने के सपने धूमिल हो रहे है। इसका मुख्य कारण है रेती घाटों की नीलामी न होना। रेती न मिलने से घरकुल साकार होने में बाधा आ रही है।  जिससे सरकार दे रहा ‘आवास’, मात्र प्रशासन छीन रहा ‘निवास’ की स्थिति दिखाई दे रही है।

1 वर्ष से नहीं हुई रेती घाटों की नीलामी 

बीते वर्ष सरकार ने अनेक घरकुलों को मंजूरी प्रदान की थी।  जिससे लाभार्थियों अपने आवास के कार्य प्रारंभ कर दिए और रेती घाट शुरू होने का इंतजार करने लगे। किंतु मार्च महीने में कोरोना आने से रेती घाटों की नीलामी नहीं सकी। इस कारण अनेक लाभार्थियों के घरकुल निर्माणधीन अवस्था में पडे है। कुछ लाभार्थियों ने अपने पुराने झोपडेनुमा घर को तोडकर उसी जगह आवास निर्माण प्रारंभ किया है। ऐसे लाभार्थियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड रहा है। ग्रीष्मकाल में भीषण गर्मी, बरसात में भीगकर, ठंड में सिकुडकर तिरपाल से बने आशियाने में रहने को विवश है।

आंदोलन भी बेअसर

जिले में रेती घाटों की नीलामी कर लाभार्थी तथा निर्माण करनेवालों को रेत उपलब्ध कराने की मांग अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की है। इस दौरान विगत दिनों सामाजिक कार्यकर्ता व लाभार्थियों द्वारा कुरखेडा तथा गडचिरोली में आंदोलन भी किया गया। मात्र इन आंदोलन का भी कोई असर नहीं हुआ। जिला प्रशासन व खनिकर्म अधिकारियों ने आश्वासन दिए, मात्र आश्वासनों की पूर्ति करना भुल गए। 

करोडों के राजस्व पर पानी

 रेती घाटों की नीलामी न होने से  जिले में अवैध रेत तस्कर सक्रिय हुए है। रेती घाटों की नीलामी व प्रशासन के कार्रवाई की बदौलत इन दिनों अवैध रूप से मिलनेवाली रेत ऊंचे दामों में बेची जा रही है। जिससे रेत तस्कर मालामाल हो रहे है। वहीं सरकार के करोडों रूपयों के राजस्व पर पानी फिर रहा है। बीते दिनों ही राष्ट्रीय महामार्ग का निर्माणकार्य करनेवाले ठेकेदार द्वारा चामोर्शी के पोहर नदी से व्यापक मात्रा में रेत का उत्खनन करने का मामला सामने आया था। 

बडों को छाटों पर कार्रवाई

बडे बडे रेती तस्कर धडल्ले से रेत की तस्करी कर रहे है, जिसकी बदौलत जिले में अनेक बडे ठेकेदारों के निर्माणकार्य जारी है। किंतु घरकुल लाभार्थी या अन्य छोटे व मोटे निर्माणकार्य करनेवाले बैलगाडी के माध्यम से नदी, नालों से रेत ला रहे है। कुछ लोग बैलगाडी चालकों से रेती ले रहे है। इस माध्यम से उन गरीब बैलगाडी चालकों को भी रोजगार उपलब्ध होता है। किंतु राजस्व विभाग इन बैलगाडी से रेत ले जानेवालों पर कार्रवाई कर उनपर भारी जुर्माना ठोंक रहे है। किंतु विशाल हायवा से रेत तस्करी करने वालों तक पहुंच भी नहीं पा रहे है।