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  • व्यापारियों के पास किसानों का 7/12

गोंदिया. रबी मौसम की धान खरीदी करने की अवधि 30 जून तक है. लेकिन इसकी अवधि बढ़ाने की मांग जोरों से शुरू है. विशेष बात यह है कि उक्त मांग किसानों की न होकर व्यापारियों की होने की बात समाने आई है. किसानों से सात बारा एकत्र कर उनके नाम पर शासकीय धान खरीदी केंद्र पर गारंटी भाव से धान की बिक्री करने के लिए कुछ व्यापारियों की जद्दोजहद शुरू है.

रबी की धान खरीदी शुरू
जिले में खरीफ व रबी ऐसे दोनों मौसम में जिला मार्केटिंग फेडरेशन व आदिवासी विकास महामंडल अंतर्गत धान की खरीदी की जाती है. फिलहाल रबी मौसम की धान खरीदी शुरू है. सरकार ने रबी फसल धान के लिए 1,815 रु. गारंटी भाव घोषित किया है. इसमें जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने रबी मौसम में 15 लाख क्विंटल तथा आदिवासी विकास महामंडल ने 5 लाख क्विंटल धान खरीदी का नियोजन किया था. इसके अनुसार 26 जून तक जिला मार्केटिंग फेडरेशन व आदिवासी विकास महामंडल ने कुल 20 लाख क्विंटल धान की खरीदी की है. जिससे इन दोनों विभागों की अपेक्षा अनुसार धान खरीदी पूर्ण हुई है. इसके अलावा अब किसानों के पास रबी धान नहीं के बराबर है. वहीं रबी धान खरीदी यह 30 जून तक की जाएगी  जिससे आगामी 3 दिनों में दोनों विभागों की धान खरीदी बंद की जाएगी.

खरीदी की अवधि 31 जुलाई तक बढ़ाने की मांग
जिले के कुछ व्यापारियों ने किसानों से कम दर पर धान की खरीदी की है. अब यही धान शासकीय धान खरीदी केंद्रों पर गारंटी भाव से बिक्री कर प्रति क्विंटल 300 से 400 रु. मुनाफा कमाने की तैयारी में कुछ व्यापारी वर्ग है. इसके लिए कुछ किसानों व जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासकीय धान खरीदी की अवधि 31 जुलाई तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. मजेदार बात यह है कि व्यापारी वर्ग सीधे शासकीय धान खरीदी केंद्रों पर धान की बिक्री नहीं कर सकता.  उन्होंने  कुछ किसानों को लालच देकर उनके सात बारा एकत्र कर लिए हैं. इतना ही नहीं कोरे विड्राल पर किसानों से हस्ताक्षर कर रखे जाने की जानकारी सामने आई है.

गंभीर नहीं है प्रशासन
जिले में इस बार रबी मौसम में 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई थी. लेकिन जिन किसानों ने रबी धान की बुआई नहीं की व जिनके खेत में दूसरी फसल लगाई गई उनके सात बारा पर रबी धान की बुआई कुछ पटवारियों की मदद से दर्ज की गई है. व्यापारी वर्ग इसी बात का लाभ उठाकर किसानों को लालच देकर अपना धान खपाने की जुगत में है. इस तरह के प्रकरणों की जांच करना कठिन कार्य है. लेकिन इस ओर प्रशासन भी दुर्लक्ष कर रहा है.