17 देशों के राजनयिकों का दल कश्मीर के दो दिवसीय दौरा पर

जम्मू: जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आज विदेश मंत्रालय का एक दल पंहुचा हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह पहली बार है जब विदेशी राजनयिक वहा आए हैं। इसमें 17 देशों के राजनयिक

जम्मू: जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आज विदेश मंत्रालय का एक दल पंहुचा हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने  के बाद यह पहली बार है जब विदेशी राजनयिक वहा आए हैं। इसमें 17 देशों के राजनयिक है जो अमेरिका, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, उज्बेकिस्तान, नाइजर, नाइजीरिया, मोरक्को, गुयाना, अर्जेंटीना, फिलीपींस, नॉर्वे, मालदीव, फिजी, टोगो, पेरू और बांग्लादेश  से पधारे हैं। यूरोपियन यूनियन इस दौरे का हिस्सा नहीं हैं। 

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ही अक्टूबर में यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने प्रदेश का दौरा किया था। उस समय वह स्थानीय लोगों से मिले भी थे। यूरोपियन यूनियन स्वेच्छा से खुद के चुने हुए लोगों से मुलाकात करना चाहते हैं। वे राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों, फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात करना चाहते हैं, जो 5 अगस्त को राज्य का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद से ही हिरासत में हैं। इसी कारण वह बाद में प्रदेश का दौरा करेंगे।
 
इसी साल 5 अगस्त, 2019 को को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की जिसके फलस्वरूप जम्मू और कश्मीर को उसके विशेष राज्य का दर्जा हट गया था। शाह ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर अब दो केंद्र शासित प्रदेशों के जायेंगे। इस पर भारत में विभिन्न राजनीतिक संगठनों से बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मजबूत प्रतिक्रियाएं मिली थी। जहाँ कश्मीर में प्रभावित क्षेत्र के निवासियों ने भी इस कदम का विरोध किया था, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया था।शुरुआती विरोध के बाद, घाटी के विभिन्न हिस्सों में अनुच्छेद 144 लागू किया गया था और गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं भी स्थगित कर दीं गयी थी।