किसान दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर जमे, कहा- आज बैठक में कुछ नहीं हुआ तो होगा संसद घेराव

नयी दिल्ली. मोदी सरकार (Narendra Modi)  के तीन विवादस्पद के कृषि कानूनों (Agriculture Law) के खिलाफ देश के किसान (Farmers) दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) पर लगातार 10वें दिन भी जमे हुए हैं।  गौरतलब है कि आज किसानों और मोदी सरकार के बीच 5वें दौर की बातचीत होनी है।  इसीके साथ खबर यह भी है कि, विभिन्न किसान संगठनों ने PM मोदी का पुतला फूंकने की घोषणा की है। वहीं आने वाली 8 दिसंबर को भारत बंद का भी आह्वान इन संगठनों ने किया है।  

किसान बोले: फूंकेंगे PM मोदी का पुतला:

दरअसल किसानों ने चेतावनी दी थी कि, अब बिल में सुधार नहीं बल्कि बिल को निरस्त किया जाना चाहिए। नहीं तो हर राज्य में बड़ी तादाद में किसान आंदोलन किये जायेंगेऔर PM मोदी का पुतला भी फूंका जायेगा। दिल्ली की सीमा पर किसान आंदोलन के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने बीते बृहस्पतिवार को दूसरी बार किसानों के साथ बातचीत की थी, जिसका भी कोई ठोंस नतीजा नहीं निकला। 

दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा: 

किसान चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली-नोएडा लिंक रोड) पर प्रदर्शन कर रहे हैं।  एक किसान ने कहा कि अगर सरकार के साथ बातचीत में आज कोई नतीजा नहीं निकला तो फिर संसद का घेराव करेंगे। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान पिछले नौ दिनों से डटे हुए हैं और उनके प्रदर्शन का 10वां दिन है।  इधर हरियाणा में जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के गृह मंत्री अनिल विज से मुलाकात की और विरोध करने पर किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने की मांग की।  गौरतलब है कि हरियाणा में आंदोलित किसानों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। JJP नेता दिग्विजय चौटाला ने कहा कि गृह मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को देखेंगे और राज्य के मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा भी करेंगे।  

क्या है किसानों की मांग:

दरअसल किसान कृषि कानून वापस लेने की अपनी बड़ी मांग पर अड़े हुए हैं, वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी ठोस भरोसा चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार कानूनों को वापस लेने की बात तो नहीं मान रही है लेकिन फिर भी किसानों की कुछ ऐसी मांग हैं जिनपर सरकार राजी होती दिख रही है। 

गौरतलब है कि इसके पहले बैठक में किसानों ने सरकार के भोजन से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने लाये लंगर के खाने को ही पसंद किया। इससे साफ़ होता है कि, सरकार और आंदोलनकारी किसानों के मध्य कितनी विश्वास में कमी है। वहीं दूसरी ओर प्रकाश सिंह बादल ने इस प्रकरण के चलते अपना पद्म विभूषण पुरस्कार लौटाया है। इसके साथ कई अन्य खिलाड़ी भी आज अपने पुरस्कार लौटाने वाले है। साथ ही, किसानों के लिए ट्रांसपोर्टर, वकील संघ भी अब आगे आ रहे हैं। अब आज फिरदोपहर 2 बजे किसानों और सरकार के बीच बैठक होगी। जिसके बाद देखना यह है कि देश के अन्नदाता पीछे हटेंगे या मोदी सरकार। जो भी हो फिलहाल किसान आन्दोलन अपने चरम पर है।