France's Airstrike in Mali, more than 50 terrorists killed
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    नई दिल्ली: पुलवामा (Pulwama) में सीआरपीएफ काफिले (CRPF Convoy) पर हुए आतंकी हमले (Terrorist Attack) के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अगले ही दिन एक सुरक्षा कैबिनेट कमेटी की बैठक बुलाई। भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ (RAW) ने आतंकी ठिकानों के सटीक इनपुट दिए और फिर 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने बालाकोट (Balakot) में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के सभी ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया।

    ऐसे मिली वायुसेना को जिम्मेदारी 

    सबसे प्रमुख बात थी रॉ से मिले इंटेल। रॉ ने आतंकी ठिकानों की एकदम सटीक जानकारी निकाली। उनके पास उन स्पॉट्स की बेहद साफ और अच्छी तस्वीरें थीं। इस मिशन की जिम्मेदारी वायुसेना को इसलिए सौंपी गई क्योंकि, टारगेट स्पॉट एलओसी से 50 किलोमीटर दूर था। अब बारी थी इसे अंजाम देने के लिए एक जेट का चयन करने की जिसके लिए मिराज को चुना गया। बालाकोट की भौगोलिक स्थितियों मिराज के चयन का सबसे जरुरी कारण था। 

    तय हुई तारीख और कोडवर्ड

    26 मार्च को इसलिए चुना गया क्योंकि सेना को एरो इंडिया एयर शो के बाद सभी विदेशी मेहमान वापिस लौटने वाले थे। फिर भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने इस मिशन को ‘बंदर’ नाम का कोडवर्ड दिया। 

    ग्वालियर से रवाना हुए मिराज

    किसी भी तरह से दुश्मन को मिशन की भनक न लगे इसलिए मिराज विमानों को ग्वालियर से उड़ाया गया। पश्चात् बरेली से होते हुए मिराज श्रीनगर के रास्ते पाकिस्तान में घुसे। 

    90 सेकेंड्स में टारगेट नेस्तनाबूद 

    हमले की रात यानी 26 फरवरी को रात 2 बजे एयरफोर्स की टीम ने उड़ान भरी। अपने मंजिल की तरफ बढ़ते हुए IAF पायलट्स को रावलपिंडी के आसमान में पाक वायुसेना का एक टोही विमान गश्त करता नजर आया। उसे वहां से भटकाने के लिए IAF दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर रवाना किया। 

    पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था। वायुसेना के सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित अपनी सरज़मीं पर लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए। यह सब कुछ केवल 90 सेकेंड्स में किया गया था। इसी के साथ यह ऑपेरशन बंदर अपने सभी टार्गेट्स को पूरी तरह तबाह करने में कामयाब रहा।