Rajnath
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नयी दिल्ली. एक तरफ जहाँ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने बीते मंगलवार को सदन में बयान देते हुए कहा कि भारत (India), चीन (China) से मिले किसी भी समस्या का जवाब देने के लिए सक्षम है और हमारी सेना (Army) हर मुश्किल से लड़ने के लिए तैयार खड़ी है।

अब राजनाथ (Rajnath Singh)  के इस बयान पर चीनी मीडिया ने भी फिर अपना भारत विरोधी राग अलापा है। यही नहीं चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने तो यहाँ तक भी कहा है कि भारत के रक्षा मंत्री का बयान नितांत उकसाने वाला है औरर इससे सीमा पर सर्दियों में तनाव बढ़ने की आशंका है।

दरअसल ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने अपने ख़ास एक्सपर्ट्स के हवाले से यह खबर दी है कि लद्दाख सीमा पर मसला जल्द सुलझता फिलहाल नहीं दिख रहा है। इस पर भारत के रक्षा मंत्री का उनके लोगों को यह बयान कि उनकी सेना और सरकार दोनों किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है थोडा संदेहस्पद होगा। जबकि हकीकत में भारत के चलते ही ऐसी परिस्थिति बनी है।

यही नहीं  ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने यह भी लिखा है कि भारत को अब यह भी समझ में आया है कि सर्दियों में उसके लिए बहुत मुश्किल होने वाली है और वो चीन के खिलाफ युद्ध चाह कर भी नहीं कर सकते हैं।इसके लिए चीन ने भारत की गिरती जीडीपी, बेरोजगारी की समस्या का हवाला दिया है।  

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत को समझ में आया है कि सर्दियों में उसके लिए मुश्किल होने वाली है और वो चीन के खिलाफ युद्ध नहीं कर सकते हैं। इसके लिए चीन ने भारत की गिरती जीडीपी, बेरोजगारी की स्मस्यओंपरेशानियों का  हवाला दे दिया दिया है।  

ग्लोबल टाइम्स यह भी लिखता है कि जिस तरह भारत की सेना पाकिस्तानी  सीमा पर छोटी-मोटी लड़ाईयों में लगी रहती है, वैसी ही स्थिति अब चीन के बॉर्डर पर बन सकती है। जिसके लिए चीनी सेना (PLA) को तैयार रहना होगा। इसके साथ ही भारत पर यह आरोप भी लगाया गया कि भारत के रक्षा मंत्री ने सीमा के हालात का सारा आरोप चीन पर दे दिया है और समझौता भी तोड़ रहे हैं।

यही नहीं ग्लोबल टाइम्स यह भी कहता है कि भारत कि ऐसी सोच है कि अगर उसकी सेना लंबे वक्त तक चीनी सीमा पर टिकी रही तो यह युद्ध शांति की ओर बढ़ जाएगी । अब जिस प्रकार से ग्लोबल टाइम्स भारत के विरोध में लिख रहा है उससे यह साफ़ जाहिर होता है कि भारत अब अगर शांति की कोशिश भी करे तो चीन और ग्लोबल टाइम्स अपनी तरफ से यह उकसावे वाले लेख लिख लिख कर  माहौल को ख़राब करने कि होड़ में लगा रहेगा जिससे शांति स्थापना कि बात तो मुश्किल ही लग रही है।