जन्मदिन विशेष: एक लम्हा जब जेआरडी टाटा ने दिलीप कुमार को पहचानने से किया इंकार

    नई दिल्ली: जेआरडी टाटा को भला कौन नहीं जानता। उद्योग क्षेत्र में टाटा ने एक अलग छाप छोड़ी है और इसमें जेआरडी टाटा की महत्वपूर्ण भूमिका है, वे अपनी दूरदर्शिता से टाटा को बुलंदियों पर ले गए। उन्होंने भारत में सबसे पहले एयरलाइंस की शुरुआत की थी। जो बाद में एयर इंडिया बनी। उनके जन्मदिन के मौके पर ऐसे महान शख्सियत के जीवन से जुड़े एक किस्से के बारें में आपको बताने जा रहे है। 

    उद्योग विकास में अहम भूमिका भारत जो आज नई बुलंदियां छू रहा है, उसमें हमारे उद्योग क्षेत्र का बेहद बड़ा हाथ है। आधुनिक भारत की औद्योगिक बुनियाद रखने वालों में जेआरडी टाटा का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा ने भारत में इस्पात, इंजीनियरिंग, होटल, एयरवेज और दूसरे उद्योगों के विकास में सबसे अहम भूमिका निभाई। 

    जेआरडी टाटा का सफर 

    जेआरडी टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 में पेरिस में हुआ था। वो अपने पिता रतनजी दादाभाई टाटा और माता सुजैन ब्रियर की दूसरी संतान थे। उनके पिता रतनजी टाटा, जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई थे। उनकी मां फ्रांस की थी। इसलिए उनका ज्यादातर बचपन फ्रांस में ही बीता। फ्रांस के बाद मुंबई आकर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई की। कैथेड्रल और जॉन कोनोन स्कूल मुंबई से पढ़ाई के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 

    जब जेआरडी टाटा दिलीप कुमार को नहीं पहचान पाएं 

    जेआरडी टाटा के बारे में एक किस्सा बड़ा मशहूर है। ये साठ के दशक की बात है। मशहूर फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार और जेआरडी टाटा एक ही प्लेन में सफर कर रहे थे। उस वक्त दिलीप कुमार कामयाबी की बुलंदियों पर थे। दिलीप कुमार ने जेआरडी टाटा को पहचान लिया, लेकिन टाटा अपने ही काम में मगन थे। वो सफर के दौरान भी कुछ फाइलों में उलझे हुए थे। दिलीप कुमार ने किसी भी तरह से उनसे बातचीत की शुरुआत करनी चाही। आखिरकार वो एक स्टार थे। लेकिन टाटा ने उनकी तरफ आंख उठाकर देखा भी नहीं। 

    दिलीप कुमार से जब नहीं रहा गया तो वो बोल पड़े- हेलो, मैं दिलीप कुमार। टाटा ने उनकी तरफ देखा। अंचभित होकर उनका अभिवादन स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए फिर अपने काम में मगन हो गए। दिलीप कुमार से जब नहीं रहा गया तो उन्होंने दोबारा बोला- मैं दिलीप कुमार हूं। मशहूर फिल्म स्टार। जेआरडी टाटा बोले- सॉरी, मैं आपको पहचान नहीं पाया जनाब। वैसे भी मैं फिल्में नहीं देखता। दिलीप कुमार रुपहले पर्दे के हीरो थे और टाटा रियल लाइफ के हीरो। 

    भारत के पहले लाइसेंसधारी पायलट जेआरडी टाटा 

    जेआरडी टाटा 1929 में भारत के पहले लाइसेंसधारी पायलट बने। वो सेना में काम करना चाहते थे।  फ्रांस की सेना में उन्होंने प्रशिक्षण भी लिया था, लेकिन अपने पिता की मौत के बाद उन्हें बिजनेस संभालना पड़ा। जेआरडी टाटा ने ही भारत में सबसे पहले कमर्शियल विमान सेवा टाटा एयरलाइंस की शुरुआत की। टाटा एयरलाइंस ही आगे चलकर 1946 में एयर इंडिया बन गई। भारत में एयरलाइंस की शुरुआत करने की वजह से ही उन्हें देश की विमान सेवा का पिता भी कहा जाता है। 

    टाटा को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया

    जेआरडी टाटा कम उम्र में ही कंपनी संभालने लगे थे। 1925 में वो ट्रेनी के तौर पर टाटा एंड संस में काम शुरू किया। लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के बल पर 1938 में वो टाटा एंड संस के अध्यक्ष बन गए। उन्होंने 14 उद्योग समूहों के साथ टाटा एंड संस के नेतृत्व की शुरुआत की थी और जब 26 जुलाई 1988 को उन्होंने अपना पद छोड़ा तो टाटा एंड संस के 95 उद्योगों का विशाल नेटवर्क स्थापित कर चुका था। इस तरह उद्योग क्षेत्र में बाकी लोगों के लिए ये आदर्श बन गए।  

    कर्मचारी के लिए कई सुविधाएं दी 

    टाटा ने उद्यमिता के साथ अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए कई काम किए। टाटा ने ही सबसे पहले 8 घंटे की ड्यूटी तय की।  उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए फ्री मेडिकल सुविधा और भविष्य निधि योजना की भी शुरुआत की। किसी कर्मचारी के साथ दुर्घटना हो जाने की स्थिति में टाटा ने सबसे पहले मुआवजा देने की पहल की। 

    जेआरडी टाटा की उपलब्धियां 

    जेआरडी टाटा 50 साल से अधिक वक्त तक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी रहे। 1955 में भारत सरकार ने उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा। 1992 में उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला।