यहां मनाई जाती है खास तरह की दिवाली, गंगा में डुबकी लगाने पहुंचते हैं भगवान

दीपावली (Diwali 2020) शब्द से ही जान पड़ता है कि दीपों का त्यौहार। इसका शाब्दिक अर्थ है दीपों की पंक्ति। ‘दीप’ और ‘आवली’ की संधि से बने दीपावली में दीपों की चमक से अमावस्या की काली रात भी जगमगा उठती है। हिन्दुओं समेत सभी धर्मों के लोगों द्वारा मनाएं जाने के कारण और आपसी प्यार में मिठास घोलने के कारण इस पर्व का समाजिक महत्व भी बढ़ जाता है। इसे ‘दीपोत्सव’ भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ कथन को सार्थक करता है दीपावली।

भारत के कोने-कोने में उमंग, उल्लास और ऊर्जा को पहुचांने में यहां के विविध त्यौहारों का अहम स्थान है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला त्यौहार दिपावली इन्हीं में से एक पर्व है। भारत में हिन्दुओं के इस खास त्यौहार को हर्षोल्लास से मनाया जाता है। दीपावली को असत्य पर सत्य की और अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है। आपके लिए खासतौर पर उन शहरों की ल‍िस्‍ट लेकर आए हैं जहां रोशनी का ये पर्व की रौनक देखी  जाती है।  

कोलकाता 

कोलकाता में दुर्गा पूजा की तरह ही दिवाली पर्व का खास आकर्षण होता है। बंगाल क्षेत्र में मान्यता है क‍ि देवी काली ने ही बुराई पर जीत हास‍िल की थी। लिहाजा इस क्षेत्र में इस वजह से दीप जलाए जाते हैं। वहीं दुर्गा पूजा की तरह ही दीवाली के मौके पर शहर में खूबसूरत काली पंडाल लगते हैं और शहर की खूबसूरती को दोगुना कर देते हैं।

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चेन्‍नई 

चेन्‍नई में दीवाली मनाने का अपना खास तरीका है। हालांक‍ि यहां धनतेरस को अधिक महत्व दिया जाता है। इस क्षेत्र में  धनतेरस को ‘धन त्रयोदशी’ या फ‍िर ‘अश्‍वयुज बहुल त्रयोदशी भी कहा जाता है। इस द‍िन कुबेर की पूजा होती है और उनको खजूर, शहद और गुड़ का भोग लगाया जाता है। घरों की खासतौर पर साफ सफाई होती है और सेहत का वरदान धन्‍वंतर‍ि से मांगा जाता है। साथ ही नरकासुर के पुतले को जलाया जाता है ज‍िसका वध अद‍ित‍ि और श्री कृष्‍ण ने क‍िया था।

अमृतसर 

पंजाब में यूं तो दीवाली का त्‍योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन इस मौके को सेल‍िब्रेट करने की अमृतसर में एक अलग ही वजह है। दरअसल, इस द‍िन गुरु हरगोब‍िंद स‍िंह मुगलों से आजाद हो कर वापस लौटे थे। इसे बंदी छोड़ द‍िवस भी कहा जाता है। ऐसे में दीवाली पर गोल्‍डन टेंपल की शोभा देखने वाली होती है।

वाराणसी 

वाराणसी में दीवाली का उत्‍सव करीब 15 द‍िन तक मनाया जाता है। गंगा के रव‍िदास घाट और राज घाट पर पंडितों द्वारा भव्‍य पूजा करते हैं। मान्यता है क‍ि इस रात देव आकाश से उतर कर गंगा के पव‍ित्र जल में डुबकी लगाते हैं। वाराणसी की यह पूजा इतनी प्रसिद्द है क‍ि लोगों को आकर्ष‍ित करने के लिए अब दीवाली के साथ गंगा महोत्‍सव भी मनाया जाने लगा है।

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गोवा 

गोवा समंदर के खूबसूरत किनारे के अलावा शानदार दीवाली महोत्सव के लिए भी जाना जाता है। यहां का मुख्‍य आकर्षण है गांवों में नरक चतुर्दशी के मौके पर जलाए जाने वाले नरकासुर के खूब बड़े पुतले। यही नहीं, यहां बड़े और भयंकर पुतले बनाने को लेकर यहां प्रतियोगिताएं भी होती हैं।

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