वास्तु-शास्त्र में ‘विजयदशमी’ का महत्व जानें, इस दिन करें ये उपाय बरसेगा धन

    -सीमा कुमारी

    इस साल ‘दशहरा’ (Dussehra 2021) 15 अक्टूबर, यानी शुक्रवार को मनाया जाएगा। ‘दशहरा’ का त्योहार ‘शारदीय नवरात्रि’ के 10वें दिन रावण और महिषासुर के वध के उपलक्ष्य में मनाते हैं। ‘विजयदशमी’ के इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन विजय मूहुर्त में शुरू किया गया कोई भी कार्य हमेशा शुभ प्रदान करने वाला होता है।

    ज्योतिष-शास्त्र में भी ‘विजयदशमी’ के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और सफलता के मार्ग खुल जाते हैं। आइए जानें उन ख़ास उपायों के बारे में –

    ज्योतिष-शास्त्र (Astrology and Dussehra) के मुताबिक, ‘दशहरा’ के दिन घर के ईशान्य कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा (North-East Corner) में रोली, कुमकुम या लाल रंग के फूलों से रंगोली या अष्टकमल की आकृति बनानी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-संपदा आती है।

    कहते हैं कि, ‘विजयदशमी’ के दिन शमी के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से कार्यों में आने वाली रूकावटें दूर होती हैं। सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

    ज्योतिषों का कहना है कि, ‘दशहरा’ के दिन पान खाने को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पान खाने से दांपत्य जीवन में सौभाग्य एवं खुशहाली आती है।

    ‘दशहरा’ के दिन शमी के पेड़ की पूजा का बड़ा महत्व है। इस दिन घर के पूजा स्थल पर शमी की जड़ के पास की मिट्टी रखने से घर में बुरी शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।

    कहा तो ये भी जाता है कि, ‘विजयदशमी’ के दिन घर की सभी नकारात्मकता और बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए ‘रावण-दहन’ की राख को सरसों के तेल में मिला कर, घर की हर दिशा में छिड़क दें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    ‘दशहरा’ के दिन ‘विजय-मुहूर्त’ में अस्त्र-शस्त्र पूजन का विशेष विधान है। माना जाता है कि ऐसा करने से शत्रु पर विजय सुनिश्चित होती है।