गोवंडी की जनता के लिए देवनार डंपिंग ग्राउंड एक अभिशाप

मुंबई.गोवंडी के शिवाजी नगर-मानखुर्द क्षेत्र के लाखों वासियों के लिए देवनार डंपिंग ग्राउंड एक अभिशाप बन गया है, जिससे निजात दिलाने कई नेताओं ने वादा किया, पर सब कोरा आश्वासन ही साबित हुआ. जन प्रतिनिधियों को जनता ने भारी मतों से चुन कर उन्हें अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए भेज तो दिया पर अभी तक इस प्रभावित इलाके के लोगों को इस अभिशाप से मुक्ति नहीं मिली है.

देवनार डंपिंग ग्राउंड को हटाने या बंद करने का सब्जबाग दिखा कर स्थानीय विधायक और उनके नगरसेवकों ने राज्य सरकार और बीएमसी के खिलाफ कई बार आंदोलन तो किया, पर डंपिंग ग्राउंड हटाने को कौन कहे, उलटा ग्राउन्ड तक सीधा कनेक्टिविटी के लिए घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड ब्रिज से देवनार डंपिंग ग्राउंड के अंदर जाने के लिए भी एक पुल बनाना शुरू कर दिया. इसका जब किसी ने इसका विरोध तक नहीं किया तो मामला साफ हो गया कि इस बाबत जनता को अंधेरे में रखने का काम किया गया.

पुल बनने के बाद भी डंपिंग ग्राउंड हटेगा  

मैंने देवनार डंपिंग ग्राउंड हटाने के लिए राज्य सरकार और मनपा के खिलाफ आंदोलन किया है और हम हमेशा से ही डंपिंग ग्राउंड के विरोध में थे और आगे भी रहेंगे. ब्रिज बनने से डंपिंग ग्राउंड नहीं हटेगा ऐसा नहीं है. जब तक इसको यहां से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं करते, तब तक कचरे की गाड़ियां नीचे से नहीं जाएगी. यह पुल सिर्फ कचरे की गाड़ियां डंपिंग ग्राउंड के अंदर चली जाए, इसके लिए नहीं बन रहा है, बल्कि डंपिंग ग्राउंड के अंदर के पहाड़ बने कचरे को बाहर लाने के लिए भी पुल का इस्तेमाल किया जाएगा. -रईस शेख, सपा विधायक/ मनपा गट नेता

डंपिंग के कचरा प्रोसेस सेंटर से मिलेगा रोजगार

बीएमसी द्वारा देवनार डंपिंग ग्राउंड में कचरे से बिजली बनाने के लिए कचरा प्रोसेस सेंटर तैयार करने की योजना बनाई है. इससे लोग कचरे और गंदगी से तो मुक्त होंगे ही, उनको इस योजना से घर के करीब रोज़गार भी मिलेगा. –रुखसाना सिद्दीकी,स्थानीय नगरसेविका

हर रोज़ हो रहे है 300 से ज्यादा लोग बीमार

देवनार डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाली दुर्गंध से अस्थमा, टीबी, फंगल इंफेक्शन, लंग और टंग का कैंसर और स्किन ख़राब करने वाली कई खतरनाक बीमारियां होती रही हैं. इन बीमारियों का शिकार अधिकतर बुजुर्ग और बच्चे होते है, गोवंडी और शिवाजी नगर और मानखुर्द इलाके में हमारी एसोसिएशन के लगभग 350 डॉक्ट प्रैक्टिस करते हैं और हर रोज़ 300 से अधिक उन मरीजों का इलाज कर रहे है जो डंपिंग ग्राऊंड से होने वाली बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. -डॉ ज़ाहिद खान, सचिव/यूनाइटेड मेडिकल एसोसिएशन

कोई सरकारी हॉस्पिटल तक नहीं

गोवंडी के देवनार डंपिंग ग्राउंड में मुंबई के कोने-कोने से हजारों टन गंदा और बदबूदार कचरा लाकर यहां फेंका जाता है जिससे इन गंदगी से निकलने वाली खतरनाक बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही है. लगभग 15 लाख जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में एक भी सरकारी हॉस्पिटल नहीं है. बीएमसी का शताब्दी हॉस्पिटल 2 किलोमीटर दूरी पर है, लेकिन उसमे सुविधाओं का अभाव है, जिसकी वजह से गरीब इलाज से महरूम रह जाता है. यही वजह है कि 60 फीसदी मरीज बिना उचित इलाज के ही दम तोड़ देते हैं. -आरिफ अब्बास सैयद, स्थानीय समाजसेवक

याद किया 20 साल पहले का संघर्ष

अपने 20 साल पहले के संघर्ष को याद करते हुए पूर्व नगरसेवक अतीक अकमल खान ने बताया कि बरसात के समय देवनार डम्पिंग ग्राउंड के अंदर का बदबूदार,गंदा और जहरीला कचरा पानी, डम्पिंग के आस-पास रहने वाले लोगों के घरों में जाता था, जिसकी वजह से लोग खतरनाक बीमारियों का शिकार हो रहे थे. कुम्भकर्ण की नींद सो रही बीएमसी को जगाने के लिए हमने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर डम्पिंग के आस-पास के नाले और गंदगी की सफाई भी की थी, लेकिन मनपा की आंख नहीं खुली. कचरे के बाद स्थानीय लोगों की दूसरी समस्या थी डम्पिंग के अंदर के पल रहे आदमखोर कुत्ते, जो डम्पिंग के आस-पास रहने वाले बच्चों को उठा कर ले जाते थे. इस तरह की कई घटना हो चुकी थी, जिसके बाद हमने उन आदमखोर कुत्तों से बच्चों को बचाने के लिए बीएमसी की एक टीम के साथ डम्पिंग में जा कर कुत्तों की धरपकड़ की और कुछ हद तक लोगों को राहत मिली. लेकिन पूर्ण समाधान नहीं मिला. जमीन से लेकर मनपा सभागृह (बीएमसी हाउस) तक संघर्ष किया, लेकिन नतीजा शून्य ही निकला. -अतीक अकमल खान, पूर्व नगरसेवक