नए तेवर के साथ शुरू हुआ सूखा मेवा मसाला मार्केट

मुंबई. कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में बंद मस्जिद बंदर का सूखा मेवा मसाला मार्केट अब पूरी तरह खुल चुका है. लॉकडाऊन में करीब 6  महीनों बंद इस मार्केट के व्यापारी अब व्यापार की नई शैली ऑनलाइन व्यवसाय को भी प्राथमिकता देने लगे हैं. 

मुंबई मेवा मसाला मर्चेंट एसोसिएसन के प्रवक्ता योगेश गणात्रा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन ट्रेडिंग सबसे अधिक हुई है, अब ग्राहक भी घर बैठे खरीदी करना चाहता है इसलिए हम दुकानों पर कारोबार के साथ लॉकडाउन व्यवसाय पर भी ध्यान दे रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कारोबार में आए व्यवसाई नए प्लेयर हैं जिनके पास पैसे और टेक्नोलॉजी है मगर अनुभव और जानकारी हमारे व्यापारियों के पास है. उन्होंने कहा कि मुंबई मेवा मसाला मर्चेंट एसोसिएसन सूखा मेवा मसाला कारोबारियों को ऑनलाइन ट्रेडिंग में प्रशिक्षित करेगी ताकि बाजारी प्रतिस्पर्धा का मुकाबला किया जा सके.

150 वर्ष पुराना है सूखा मेवा मसाला मार्केट

मस्जिद बंदर का सूखा मेवा मसाला मार्केट एशिया का सबसे पुराना मेवा मसाला बाजार है. इस सूखा मेवा मसाला मार्केट में अन्य सेंटरों की तुलना में 10  से 30  प्रतिशत सस्ते मेवे बेचे जाते हैं. गणात्रा ने बताया कि सूखा मेवा का व्यवसाय इस समय बेहद मंदी के दौर से गुजर रहा है. सूखा मेवा का कारोबार त्योहारों पर सबसे अधिक होता है. वैवाहिक समारोह में भी सूखे मेवे की मांग खूब रहती है. कोरोना की वजह से इस बार त्यौहार पर बाजार फीका ही रहा. सर्दियों में अंजीर,अखरोट,बादाम और खजूर की अच्छी बिक्री होती है.

सूखे मेवे की कोई कमी नहीं होगी

उन्होंने बताया कि दुनिया में कोरोना महामारी की वजह से हमारे यहां सूखे मेवे की कोई कमी नहीं होगी. देश में काजू, बादाम, अखरोट, अंगूर पैदा होता है, जबकि अधिकांश सूखा मेवा का आयात किया जाता है. अफगानिस्तान के साथ करार होने से वहां से आयातित अंजीर, जरदालू, किसमिस, पिस्ता पर आयात शुल्क नहीं लगता. अमेरिका से बादाम, वालनट, पिस्ता का आयात होता है. इरानियन बादाम मगज मामरो सबसे महंगा सूखामेवा है जो प्रति किलो 1500  से 6000 रूपये किलो तक के रेंज में बिकता है.