Self-confidence is the first formula to become self-reliant: Governor

  • एक्सपोर्ट पर बैन को लेकर देंगे निवेदन 
  • 25 को देशव्यापी आंदोलन 
  • प्याज पर सियासी तड़केबाजी  

मुंबई. प्याज के एक्सपोर्ट पर लगे बैन के बाद अब किसानों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने का फैसला किया है. शेतकरी संघर्ष संगठन से जुड़े किसानों ने कहा है कि राज्यपाल एक संवेदनशील व्यक्ति हैं. ऐसे में वे हमारी समस्या को जरूर सुनेंगे.नाशिक के किसान नेता हंसराज वाडघुले ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर इस मामले में राज्यपाल कोश्यारी से मदद की अपील की है.  

कंगना की सुनी तो हमारी भी सुनेंगे 

प्याज किसानों का कहना है कि कुछ दिनों पहले जब बॉलीवुड एक्ट्रेस की ऑफिस पर बीएमसी की तोड़ू कार्रवाई हुई तो राज्यपाल कोश्यारी ने एक्ट्रेस की समस्या को सुना था. ऐसे में जब केंद्र की प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने प्याज के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है, तो राज्यपाल हमारी समस्या को भी जरूर सुनेंगे. प्याज किसानों की अपील है कि राज्यपाल उनकी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार से बात कर इसका समाधान निकालें.   

किसानों के साथ धोखाधड़ी 

अखिल भारतीय किसान सभा के नेता डॉ. अजीत नवले ने कहा है कि मोदी सरकार का यह फैसला प्याज किसानों के साथ धोखाधड़ी है. उन्होंने कहा कि एक बार जब प्याज को आवश्यक उपभोक्ता की लिस्ट से हटा दिया गया था तो फिर इसके एक्सपोर्ट पर बैन लगाना सरासर गलत है.नवले ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से पूरी तरह अंजान किसानों और व्यापारियों ने भारी मात्रा में प्याज की खरीदी की थी. करोड़ों टन प्याज एक्सपोर्ट के लिए पोर्ट पर पड़ा हुआ है. इसके नुकसान का जिम्मेदार कौन है. नवले ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ 25 सितंबर को राष्ट्रव्यापी आंदोलन आह्वान किया गया है, जिसमें पूरे देश के किसान भाग लेंगे. 

किसानों ने मुड़ाए सिर

प्याज के एक्सपोर्ट पर बैन के खिलाफ राज्यमंत्री बच्चू कडू व उनके प्रहार संगठन ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. येवला तालुका में किसानों ने अपने सिर मुड़वा कर केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया. प्याज के एक्सपोर्ट पर  बैन को लेकर महाराष्ट्र में सियासत तेज हो गई है. महाराष्ट्र विकास आघाड़ी में शामिल दल इस मुद्दे को लेकर बीजेपी को जबरदस्त तरीके से घेरने की तैयारी में हैं. केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ जहां प्रदेश कांग्रेस का आंदोलन जारी है, वहीं शिवसेना और एनसीपी भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर लगातार हमलावर है.