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    मुंबई. शिवसेना के साथ महाविकास आघाड़ी सरकार बना कर भाजपा को जोरदार झटका देने वाले राकां प्रमुख शरद पवार एक बार फिर बीजेपी को शिकस्त देने की तैयारी में जुट गए हैं. इसके लिए महाविकास आघाड़ी के घटक दलों के बीच रणनीति पर चर्चा की जा रही है.

    रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी महाविकास आघाड़ी

    पिछले साल अक्टूबर माह के विधानसभा चुनाव में शिवसेना -भाजपा की युति थी. दोनों दलों के उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत सफलता भी मिली,लेकिन सरकार बनाने में पेंच फंस गया.नाटकीय घटनाक्रम के तहत राकां प्रमुख शरद पवार ने राज्य में शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में तीन दलों वाली महाविकास आघाड़ी की सरकार बनवा दी. राज्य की सत्ता से बाहर करने के बाद पवार अब भाजपा को राज्यसभा के चुनाव में झटका देने की तैयारी में हैं.

    सीट बंटवारे पर चल रही माथापच्ची

    देवेंद्र फडणवीस

    अप्रैल माह में महाराष्ट्र से राज्यसभा के सात सदस्य रिटायर हो रहे हैं.जिन राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता खत्म हो रही है, उनमें राकां प्रमुख शरद पवार एवं केंद्रीय समाज कल्याण राज्यमंत्री आरपीआई नेता रामदास आठवले का नाम शामिल है. शिवसेना के राजकुमार धूत ,राकां के माजिद मेनन,कांग्रेस के हुसैन दलवई,भाजपा के अमर साबले एवं निर्दलीय संजय काकडे की सदस्यता भी समाप्त हो रही है. विधानसभा में दलीय स्थिति के तहत शिवसेना ,कांग्रेस एवं राकां आघाड़ी को 4 एवं भाजपा को 2 सीट आसानी से मिल सकती है.सातवीं सीट के लिए संघर्ष होनी है.जिसको लेकर महाविकास आघाड़ी में ही खींचतान हो रही है.

    राज्यसभा चुनाव में एक सदस्य के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरुरत है. भाजपा के 105 निर्वाचित विधायक हैं एवं पार्टी को 9 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है.जबकि महाविकास गठबंधन में शिवसेना के 56,राकां के 54 एवं कांग्रेस 44 विधायक हैं. 15 निर्दलीय विधायक सतारूढ़ दल के उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं. राकां प्रमुख शरद पवार एवं केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले का फिर से राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है. शिवसेना कोटे से कोई दूसरा राज्यसभा में जा सकता है.सातवीं सीट पर आघाड़ी का उम्मीदवार जिताने के लिए रणनीति को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है. विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सातवीं सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखने के लिए प्रयत्नशील हैं.

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    • राज्यसभा चुनाव में एक सदस्य के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरुरत है,महाविकास गठबंधन में शिवसेना के 56,राकां के 54 एवं कांग्रेस 44 विधायक हैं,विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सातवीं सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखने के लिए प्रयत्नशील हैं.

      बता दें कि इससे पहले बिहार में बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रमुख रामविलास पासवान ने भी इस साल चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है. NDTV से बात करते हुए उन्‍होंने कहा, ’50 साल बाद मैं अब अंतत: चुनाव नहीं लड़ूंगा.’ पासवान हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्‍होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. बिहार की 40 सीटों में से 6 पर लोजपा चुनाव लड़ेगी और पासवान संभवत: राज्‍यसभा जाएंगे. ऐसे में हाजीपुर से चुनाव कौन लड़ेगा उसपर पासवान का कहना है कि ‘हाजीपुर लोकसभा सीट पर मेरा उत्तराधिकारी कौन होगा ये पार्टी तय करेगी.

      बता दें कि लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. इस बार कुल सात चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं. पहला चरण 11 अप्रैल को जबकि अंतिम चरण 19 मई को होगा. वोटों की गिनती 23 मई को होगी.

      7 चरणों में होंगे लोकसभा चुनाव
      चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा (Lok Sabha Election 2019 Date, Schedule) कर दी है. इस बार 7 चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे और 23 मई को नतीजे आएंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव तिथियों की घोषणा करते हुए कहा कि सभी एजेंसियों से राय ली. चुनाव खर्चे पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. त्‍योहारों का ध्‍यान रखा गया. उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में 90 करोड़ लोग वोट डालेंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि हम चुनाव के लिए काफी पहले से ही तैयारी कर रहे थे. सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव आयुक्त से बात की. उन्हें तैयारी करने के लिए कह दिया गया था. लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन भी जांची गई. यह सब करने के बाद ही आज हम चुनाव की घोषणा करने की स्थित में हैं.

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      1.5 करोड़ मतदाता पहली बार डालेंगे वोट, कुल 90 करोड़ लोग करेंगे मतदान
      लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) की तारीखों का ऐलान हो चुका है. इस बार कुल सात चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं. पहला चरण 11 अप्रैल को जबकि अंतिम चरण 19 मई को होगा. वोटों की गिनती 23 मई को होगी. इस बार भी ऐसे मतदाताओं की संख्‍या बड़ी है जो पहली बार वोट डालेंगे. मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने रविवार को कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव में मतदान करनेवालों की संख्या लगभग 90 करोड़ होगी. उन्होंने आगामी चुनाव को लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार बताया. उन्होंने कहा कि इस बार लगभग 10 लाख मतदान केंद्र होंगे, जो 2014 के आम चुनाव में रहे नौ लाख से अधिक है. कुल मतदाताओं में 1.50 करोड़ मतदाता 18-19 साल उम्र के होंगे. उन्होंने कहा, “निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए एक बहुत ही व्यापक तैयारी की है.”

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      शिवसेना और भाजपा ने गत वर्ष अक्टूबर में विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन मुख्यमंत्री का पद ढाई वर्ष बारी बारी से साझा करने के मुद्दे पर असहमति के चलते दोनों अलग हो गईं। उसके बाद शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस एकसाथ आईं और काफी विचार विमर्श के बाद राज्य में सरकार बनाई। विधानसभा में पटखनी देने के बाद शरद पवार अब राज्यसभा चुनाव में भाजपा से भिड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंस सकता है।

      अप्रैल में महाराष्ट्र से सात राज्यसभा सदस्य सेवानिवृत्त होने वाले हैं। माना जा रहा है कि इसमें चार सीट शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी और दो सीटें भाजपा के खाते में जा सकती है। लेकिन असल जंग सातवी सीट के लिए होनी तय है। उच्च सदन की इस एक अतिरिक्त सीट के लिए महाराष्ट्र विकास अघाडी के तीन सहयोगियों के बीच रस्साकशी हो सकती है।

      राज्यसभा के सदस्य को चुनने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी के 105 विधायक हैं और उसे नौ निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शिवसेना के 56 विधायक हैं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के पास 54 और 44 विधायक हैं। शेष 20 विधायकों में से कम से कम 15 से राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन करने की उम्मीद है।

      अप्रैल में रिटायर होने वाले राज्यसभा सांसदों में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, उनकी पार्टी के सहयोगी माजिद मेनन, कांग्रेस के हुसैन दलवई, शिवसेना के राजकुमार धूत, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (आरपीआईए), भाजपा के अमर सब्बल और निर्दलीय सांसद संजय ककड़े हैं।

      सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास अघाडी गठबंधन की 169 विधायकों की मदद से इन सात सीटों में से चार पर जीत सुनिश्चित है, जबकि भाजपा भी सहयोगी और निर्दलीय से समर्थन के साथ आसानी से 2 सीटें जीत सकती है। सातवीं सीट के लिए किसी भी पक्ष के पास संख्या नहीं है। बता दें राज्यसभा उम्मीदवार विधायकों द्वारा चुने जाते हैं। विधायक सभी उम्मीदवारों के लिए अपनी वरीयता का आदेश देते हैं। यदि पहली वरीयता के मतों के माध्यम से एक सीट का निर्धारण नहीं किया जाता है, तो दूसरी वरीयता के मतों की गणना की जाती है।

      सत्तारूढ़ गठबंधन दूसरी वरीयता के वोटों के माध्यम से सातवीं सीट हासिल करने की स्थिति में है, उम्मीदवार की पसंद को लेकर कांग्रेस और राकांपा के बीच टकराव होने की संभावना है। लिहाजा सातवीं सीट के लिए जोड़तोड़ की गणित के आसार हैं। ऐसे में विधायकों की पसंद काफी अहम होगी और ऐसे में विधायकों के टूटने की आशंका भी है।

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      NavaBharat यांनी वर पोस्ट केले बुधवार, १२ फेब्रुवारी, २०२०