परीक्षा शुल्क वसूली परिपत्र से ‘छात्र भारती’ नाराज

– विश्वविद्यालय के परीक्षा व मूल्यांकन बोर्ड निदेशक को लिखा पत्र

मुंबई. मुंबई विश्वविद्यालय की रद्द की गई परीक्षाओं के बावजूद छात्रों से परीक्षा शुल्क तथा नियमित शुल्क वसूलने के लिए परिपत्र निकाला गया है, जिसके कारण विश्वविद्यालय के छात्रों और यूनियन में रोष है. कई कॉलेज शुल्क वसूल रहे हैं. कुछ कॉलेजों ने पहले ही परीक्षा व नियमित शुल्क वसूल लिए थे, वे कॉलेज छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा देने पर विवश कर रहे हैं, ताकि उन्हें छात्रों को फीस वापस ना करना पड़े.

 विश्वविद्यालय के परिपत्र के तहत 23 जून से 3 जुलाई तक नियमित शुल्क, 4 जुलाई से 8 जुलाई तक विलंब शुल्क और 9 जुलाई से 13 जुलाई तक अति विलंब शुल्क के साथ छात्र फीस भर सकते हैं. सवाल यह उठता है कि जब राज्य सरकार ने स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और छात्रों को ग्रेडेशन के आधार पर पास करने की बात कही है, इसके बावजूद परीक्षा शुल्क क्यों वसूला जा रहा है. 

 परीक्षा नहीं तो शुल्क क्यों?

इस संबंध में मुंबई विश्वविद्यालय की छात्र यूनियन ‘छात्र भारती’ ने विश्वविद्यालय के परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड के निदेशक विनोद पाटिल से पत्र लिखकर परीक्षा शुल्क ना वसूलने की अपील की है. छात्र भारती के अध्यक्ष रोहित ढाले ने पत्र में यह लिखा है कि जब परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं तो परीक्षा शुल्क वसूलने का परिपत्र जारी करने का क्या मतलब है. उन्होंने कहा कि वैसे भी कोरोना महामारी के कारण कंपनियां बंद होने से अधिकांश अभिभावकों की नौकरियां चली गईं, बहुत सारे लोगों को पेमेंट नहीं मिल रहा है या पेमेंट में कटौती की गई है. वे लोग कैसे फीस भर सकते हैं? विश्वविद्यालय और कॉलेजों को इस विकट स्थिति में छात्रों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखकर कोई निर्णय लेना चाहिए.

 शुल्क वापस करें कालेज

 ढाले ने कहा कि छात्रों को ग्रेडेशन के आधार पर उत्तीर्ण करने की व्यवस्था ठीक है, लेकिन जिन छात्रों को लगता है कि वे अपने रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं तो उनकी परीक्षा लेनी चाहिए और उसी समय उनसे परीक्षा शुल्क वसूलना चाहिए. सभी छात्रों से बकाया शुल्क वसूलना उचित नहीं है. उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन कालेजों ने लॉकडाउन से पहले ही नियमित और परीक्षा शुल्क वसूल लिए थे, उन्हें छात्रों को वापस करना चाहिए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब छात्र परीक्षा देंगे तो उनसे परिस्थितियों के हिसाब से कम से कम शुल्क वसूला जाए.