Mahavitaran gave 71 thousand connections in Vidarbha in lockdown

  • 06 महीने की एक साथ रिडिंग
  • 05 गुना अधिक बिल

नागपुर. महावितरण की मनमानी का एक और ग्राहक शिकार हुआ है. इस ग्राहक के घर के मीटर की रिडिंग ही 6 महीने नहीं की गई. औसत बिल भेजा जाता रहा और फिर सितंबर महीने में सीधे 2479 यूनिट का 24726.55 का बिल भेज दिया गया. गरीब ग्राहक जिनके घर का पिछला रिकार्ड रहा है कि 75 से 125 यूनिट के लगभग भी हर महीने यूनिट की खपत होती है. भरी गर्मी मई व जून के महीनों में 126 यूनिट से ऊपर कभी खपत नहीं हुई ऐसे में महावितरण द्वारा भारी-भरकम बिल थमा दिये जाने से ग्राहक की हालत खराब हो गई है.

उन्होंने बताया कि संबंधित बिजली कार्यालय में जाने पर उन्हें दो टूक कह दिया गया कि बिजली का बिल तो भरना ही होगा. अब इतनी रकम वे कहां से लाएं यही चिंता खाये जा रही है. मामला वाड़ी के आंबेडकरनगर में रहने वाले कैलाश रामजी रामटेके परिवार का है जिनका ग्राहक क्रमांक 410013162194 है.

कोरोना काल में मार्च महीने में जब लाकडाउन लगा तो महावितरण ने घरों की मीटर रिडिंग बंद कर एवरेज बिल भेजना शुरू किया था लेकिन 3 महीनों में ही कंपनी ने रिडिंग शुरू करने का दावा किया था. सवाल यह उठ रहा है कि रामटेके के घर 6 महीने के बाद कैसे रिडिंग हुई. 2 मार्च के बाद सीधे 4 सितंबर को रीडिंग कर बिल भेजा गया. ग्राहक को अंदेशा है कि उनका मीटर जरूर खराब हुआ है और तेजी से चल रहा क्योंकि इतनी बिजली की खपत कभी रही ही नहीं लेकिन अब कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

पिछले वर्ष इसी अवधि में 531 यूनिट
इस ग्राहक के घर पिछले वर्ष 2019 में मई से लेकर सिंतबर तक 5 महीने में कुल 531 यूनिट की खपत हुई थी जिसका कुल बिल 3634.65 रुपये आया था. मई 2019 में 126 यूनिट, जून 98, जुलाई 113, अगस्त 72 और सितंबर में 122 यूनिट की खपत हुई थी. लेकिन इस वर्ष कोरोना काल में महावितरण मार्च के बाद से रिडिंग ही बंद कर दी. मई, जून, जुलाई, अगस्त 2020 इन चार महीनों का हर महीने 58 यूनिट का 446.34 रुपयों का बिल भेजा जाता रहा. लेकिन 4 सितंबर में रिडिंग होना दर्शाया गया और एक ही महीने में 2479 यूनिट का 22941.19 रुपये का बिल ठोक दिया. मई से सितंबर तक का कुल बिल 24726.55 रुपये भेजा गया है जिसे देखकर ग्राहक की रूलाई फूट गई.

ऊर्जामंत्री को कर रहे बदनाम
ऊर्जामंत्री नितिन राऊत ने सख्त हिदायद दे रखी है कि बिना कारण बिजली गुल नहीं होनी चाहिए. ग्राहकों को उत्तम सेवा का निर्देश भी उन्होंने कई बार बैठकों में दिया है. बावजूद हालत यह है कि सिटी में हर दिन किसी न किसी सुधार कार्य के नाम पर बिजली गुल तो की ही जा रही है, इस तरह मनमाना बिल भेजकर ग्राहकों को तंग भी किया जा रहा है. कार्यालय जाने पर ग्राहक की समस्या सुनकर उसका निदान करने की बजाय बिल भरना ही पड़ेगा बोलकर टरकाया जा रहा है. एक सवाल यह भी कि आखिर 6-6 महीने मीटर की रीडिंग क्यों नहीं की गई. यदि की गई होती तो ग्राहक की भी समझ में आ जाता कि कुछ गड़बड़ जरूर है और वह शिकायत कर सकता था.