Sandeep Joshi and Tukaram mundhe

  • 6 जुलाई तक महापौर ने मांगा स्पष्टीकरण

नागपुर. मनपा की सभा में स्थगन प्रस्ताव पर गत 4 दिनों से लगातार चली चर्चा के बाद भले ही विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से वाकआऊट किया हो, लेकिन अंत में महापौर संदीप जोशी ने सदन में पार्षदों द्वारा उठाए गए कई प्रश्नों और लगाए गए आरोपों के संदर्भ में मनपा आयुक्त मुंढे को 6 जुलाई तक लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए. एक-एक मुद्दे पर निर्देश जारी करते हुए महापौर ने कहा कि भले ही कानून और नियमों में पार्षद साठवने पर दायर एफआईआर वापस लेने की जटिल प्रक्रिया हो, लेकिन शिकायत वापस लेने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए.

विशेषत: के.टी. नगर पीएचसी में हुए निर्माणकार्य एवं अन्य मामलों की जांच के लिए स्थायी समिति सभापति झलके की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी. जिसमें अति. आयुक्त निपाने को भी शामिल करने के निर्देश दिए. के.टी. नगर के साथ ही आयुक्त द्वारा कायाकल्प किए गए 5 अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश भी समिति को दिए. इसके अलावा गत 5 वर्षों में मलजल टाकों पर के चेंबर पर कितना खर्च किया गया. लगातार क्यों टूट रहे हैं. इसकी जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश मुख्य अभियंता को दिए.

निलंबित किए गए गंटावार दम्पत्ति 
एनडीएस कर्मचारी संदीप उपाध्याय को तुरंत नौकरी से बर्खास्त करने और वाहन चालक प्रमोद हिवसे का प्रमोशन कैसे किया गया. इसकी भी जांच करने के निर्देश झलके समिति को दिए. विशेषत: भाजपा के वरिष्ठ पार्षद दयाशंकर तिवारी की ओर से सोशल मिडिया पर सामाजिक द्वेष फैलाने के पोस्ट और पार्षदों पर कड़ी टिप्पणी का मामला उठाया गया था. जिसके संदर्भ में महापौर ने मनपा को तुरंत ऐसे लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने के आदेश दिए. महापौर ने कहा कि नंदलाल समिति ने किसी भी कार्य के टूकड़े कर टेंडर मंगाने पर आपत्ति जताई थी. के.टी. नगर अस्पताल मामले में जिस अधिकारी ने टूकड़ों में टेंडर दिया. उसे आयुक्त रोक सकते थे. किंतु मंजूरी प्रदान की गई.

मनपा नियम 73 (ड) के अनुसार इसकी जानकारी 15 दिनों में स्थायी समिति को देनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा ना कर आयुक्त द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है. जिसे गंभीर बताते हुए महापौर ने आयुक्त को 6 जुलाई तक स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए. यहां तक कि मनपा में नौकरी करते हुए निजी अस्पताल चलाने तथा कई मामलों में प्रवीण गंटावार और उनकी पत्नी की कार्यप्रणाली विवादित होने के कारण उन्हें तुरंत निलंबित करने के आदेश भी दिए. प्रथमदर्शी दम्पत्ति दोषी दिखाई देने का हवाला देते हुए झलके समिति को 15 दिनों के भीतर जांच करने के आदेश भी दिए. महापौर ने कहा कि मनपा के इंदिरा गांधी अस्पताल में रखे हाजिरी रजिस्टर को कुछ लोगों द्वारा प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. इस हाजिरी रजिस्टर को तुरंत अधिकार में लिया जाए. यदि रजिस्टर गायब दिखाई दे. तो संबंधितों पर फौजदारी मामला दर्ज किया जाए.

छुट्टी की क्यों नहीं दी जानकारी
महापौर जोशी ने कहा कि मनपा में आयुक्त पद पर आने के बाद कई बार अनेक कारणों से वे छुट्टी पर गए. मुख्यालय छोड़ा है. जिसके लिए मनपा कानून के अनुसार राज्य सरकार या स्थायी समिति से इसकी अनुमति लेनी चाहिए थी. कम से कम समिति को जानकारी देनी चाहिए थी. किंतु आयुक्त की ओर से इसका पालन नहीं किया गया. इसका स्पष्टीकरण भी देने के निर्देश आयुक्त को दिए गए. आयुक्त द्वारा सोशल मिडिया पर वक्तव्य कर मनपा और जनप्रतिनिधियों पर आरोप किया है. सोशल मिडिया पर मुलाकात के लिए मनपा की अनुमति लेना अनिवार्य है. लेकिन नियम और अनुशासन का उल्लंघन किया गया. जिसका स्पष्टीकरण दिया जाए.

इसी तरह आयुक्त की ओर से कोरोनाकाल में अधिकारियों की कुछ विभागों में नियुक्तियां की गई. जिसे तुरंत रद्द किया जाए. आयुक्त के अधिकार में आनेवाले अधिकारी और कर्मचारियों को छोड़कर जिन अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से छुट्टी ली गई, उसे तुरंत रद्द किया जाए. ऐसे लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर 8 दिनों में स्थायी समिति को रिपोर्ट सौंपी जाए. इसी तरह मनपा में आने के बाद आयुक्त ने जिन कार्यादेशों पर रोक लगाई, उसे तुरंत मंजूरी प्रदान करने के आदेश भी दिए.