कोविड से अनाथ हुए बच्चों की रिपोर्ट तैयार करें, जिलाधिकारी ने बैठक में दिए निर्देश

    • 46 बच्चों ने गंवाए माता-पिता
    •  1,370 बच्चों के खोया एक पालक
    • 381 की सामाजिक रिपोर्ट तैयार

    नागपुर. जिलाधिकारी विमला आर. ने कोविड-19 की चपेट में आए अपने माता-पिता या दोनों में एक को गंवा देने वाले बच्चों की सामाजिक जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि में तैयार करने का निर्देश दिया है. उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला महिला व बाल विकास अधिकारी अपर्णा कोल्हे, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजीव थोरात, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुश्ताक पठान, संरक्षण अधिकारी विनोद शेंडे, साधना हटवार, परीविक्षा अधिकारी धनंजय उभाल, डॉ. दीपिका साकीरे, मनपा समाज कल्याण अधिकारी दिनकर उमरेडकर, जिला विधि सेवा प्राधिकरण के अधीक्षक प्रकाश कांचनवार, चंदा खैरकर उपस्थित थे.

    जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सामाजिक जांच के लिए स्टाफ की कमी नहीं होनी चाहिए. इस पर गंभीरता से ध्यान दें. विभाग की ओर से दोनों पालकों की मृत्यु पर बच्चों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल दी जाएगी. एक पालक की मृत्यु पर भी बालक को सरकार की योजना का लाभ दिया जाएगा. 

    स्वास्थ्य विभाग करे सहयोग

    विमला आर. ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जांच के कार्य में तहसील स्तर पर सहयोग करे. दोनों पालकों को गंवाने वाले बालकों को अनाथ प्रमाणपत्र के लिए तहसीलदार और पुलिस यंत्रणा की मदद लें. इसी तरह कोविड से एक पालक व दोनों पालक को गंवाने वाले बच्चों के शाला शुल्क के संदर्भ में शिक्षाधिकारी से चर्चा कर निर्णय लेने का निर्देश उन्होंने दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के रिश्तेदारों का भी समुपदेशन करना जरूर है. 

    1,370 आवेदन मिले

    कोल्हे ने बैठक में जानकारी दी कि दोनों पालकों को गंवाने वाले 46 बच्चों में से 19 को अनुरक्षण गृह में रखा गया है. 3 बालकों को आशा किरण बालगृह में और एक को उनके रिश्तेदार को सौंपा गया है. एक पालक गंवाने वाले 1,370 बच्चों के आवेदन प्राप्त हुए हैं. 381 बालकों की सामाजिक रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है. शेष की रिपोर्ट तैयार की जा रही है. उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के चलते विधवा हुईं 599 महिलाओं का पंजीयन हुआ है. विधि सेवा प्राधिकरण के द्वारा 42 में से 36 बालकों को मदद की गई है.