Remedesivir injection

  • कंपनी-डीलर हुए सक्रिय

नागपुर. रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों और डीलरों के बीच सांठगांठ के कारण नागपुर जिले में दवाओं की कृत्रिम कमी कर दी गई है. स्टाक नहीं रहने का बहाना बनाकर ग्राहकों और अस्पतालों को लूटा भी जा रहा है. 800-1,000 रुपये की दवाएं आज खुले में 4,500 से 5,000 में और हॉस्पिटल संचालकों को 2,000 रुपये में बेचने का गोरखधंधा भी शुरू हो गया है. इतना ही नहीं कई मरीजों की सांसे भी फूलने लगी है. समय रहते कठोर कदम नहीं उठाया गया, मरीजों के हाल बेहाल हो जाएंगे. हालांकि, जिला प्रशासन ने दूकानों के जरिए रेमडेसिविर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे कुछ नहीं होने वाला है.

कंपनियां गठजोड़ कर अंधाधुध कमाई के मूड में आ गईं हैं और कुछ सरकारी विभाग भी इस खेल को देख रहे हैं. अस्पताल संचालकों ने बताया गया कि 15 दिन पूर्व तक दवा बनाने वाली कंपनियां अस्पतालों को 725, 860, 900, 950, 1,000, 1,050, 1,100 में दवाओं की आपूर्ति कर रही थी. लेकिन पिछले 4 दिनों में इसके दाम बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिए गए हैं. आश्चर्य की बात तो यह है कि मनपा के अधिकारी से अस्पतालों को 800 की दवा 2,500 रुपये में मिल रही है और अधिकारी कुछ भी नहीं कह रहे हैं. अस्पताल वाले बिल और पेमेंट की राशि भी दिखा रहे हैं, लेकिन उन्हें पुरानी दरों पर माल नहीं दिया जा रहा है.

मरीजों की बचेगी जान

अस्पताल संचालकों का कहना है कि लूट को रोकने के लिए सरकार को रेमडेसिविर की कीमत तय कर देनी चाहिए. इसी से लूट रुक सकती है. अन्यथा कंपनी और सरकारी अधिकारी मनमानी करते रहेंगे और लोगों की जेबें ढीली होती रहेंगी. उनका कहना है कि सरकार अगर 1,000 से 1,500 रुपये भी कीमत तय कर देती है, तो मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिल जाएंगी. इतना ही नहीं माल का सार्टेज होने वाली समस्या भी खत्म हो जाएगी.