…तो उपराजधानी में ही सकते हैं दोनों सत्र

नागपुर. विधानमंडल का शीतकालीन सत्र मुंबई में लिये जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब तक इसकी तिथि निश्चित नहीं हो पाई है. परंतु सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए शीतकालीन व बजट सत्र संयुक्त रूप से फरवरी में उपराजधानी में ही लेने का विचार शुरू है. कोरोना के खतरे को ध्यान में रखते हुए 7 दिसंबर से नियोजित शीत सत्र को नागपुर में न लेने का निर्णय विधिमंडल की कामकाज सलाहकार समिति ने इस माह के पूर्व लिया था. मुंबई में होने वाले सत्र की तिथि बाद में निश्चित की जाने वाली है. दिसंबर का शीतकालीन सत्र टालने के बाद इसके जनवरी में  होने की चर्चाएं उड़ी थीं. उसमें अभी दोनों भी सत्र एकत्रित कर उपराजधानी में लेने का विचार शुरू है. 

कम नजर आ रही संभावना

नागपुर में जनवरी के दूसरे सप्ताह में शीत सत्र होता है, तो इसके लिए कम से कम 1 से डेढ़ माह पहले तैयारियां शुरू करनी पड़ेंगी. सरकार की ओर से सूचना आने के बाद प्रशासन के सामने तैयारी के बिना और दूसरा कोई पर्याय नहीं रहेगा. शीत सत्र के बाद फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के पहले सप्ताह में बजट सत्र रह सकता है. कोरोना का खतरा अभी कम नहीं हुआ है. ऐसी स्थिति में जनवरी में इसकी संभावना कम है. मुंबई में जनवरी में सत्र लेने के बाद बजट सत्र के लिए कम समय मिलेगा और फिर से नागपुर का विचार किया गया तो नये तरह से तैयारी करना पड़ेगा. इसके बदले दोनों सत्र एकत्रित कर उचित कालावधि व स्थान पर लिया गया तो मार्ग निकल सकता है.

नागपुर में अधिवेशन न होने से ठाकरे सरकार पर टीका- टिप्पणी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले, मंत्री नितिन राऊत, सुनील केदार, विजय वड्डेटीवार के साथ ही विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस भी नागपुर में एक सत्र होने के पक्ष में हैं. इसके चलते दिसंबर के पहले सप्ताह में 1 या 2 तारीख को कामकाज सलाहकार समिति की बैठक होने वाली है. इस बैठक में इससे संबंधित ठोस निर्णय होने की संभावना सूत्रों द्वारा व्यक्त की गई है. दोनों सत्र एकत्रित होंगे तो नागपुर करार का पालन होगा.