कोरोना की जंग में लोगों की सेवा में जुटे दो सगे भाई

दुर्गम स्थानों से मरीजों को ला रहे स्वास्थ्य केंद्र

साक्री. अटल आरोग्य वाहिनी एम्बुलेंस सेवा के चालक जी जान से कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में योद्धा बन कर उभरे हैं. ये दोनों भाइयों के कार्य को सराहा जा रहा है. उनका पैतृक गांव साक्री तहसील क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत चौपाले के अंतर्गत बस्ती टाकली पाड़ा है. बस्ती के ग्रामीण व माता-पिता को उनके इस साहसिक कार्य पर गर्व है, वहीं इनके कार्य की प्रशंसा करते हुए राज्य के आदिवासी विकास विभाग ने उनके प्रयासों को अपने सोशल मीडिया पेज पर लोड किया है. ये भाई हैं रमेश और गुलाब भोये, जो आदिवासी विभाग की एम्बुलेंस के चालक हैं. विगत ढाई महीने से कोरोना के प्रकोप से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. शुरुवाती दौर में सीमित अस्पताल , चिकित्सा और  परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध थीं. ऐसे में मरीजों को जिला स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता था. 

एम्बुलेंस में डटे रहते हैं चौबीस घंटे

आदिवासी विभाग के धुलिया परियोजना के अंतर्गत साक्री तहसील क्षेत्र की ग्राम शिरसोले और ग्राम बोपखेल स्थित आश्रम शाला को अटल आरोग्य वाहिनी योजना में रोगियों को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने हेतु एम्बुलेंस दी गई है. इसी एम्बुलेंस पर दोनों भाई कार्यरत हैं. 12 अप्रैल से कोरोना बाधित मरीजों को लाने-ले जाने व वाहन को सैनिटाइज करने जैसे खतरनाक काम पर ये दोनों चौबीसों घंटे जुटे हैं.  ग्रामीण क्षेत्रों से साक्री स्थित कोविड सेंटर और ग्रामीण अस्पताल में रोगियों को लाना, इन केंद्रों से जिला स्तर पर स्थित स्वास्थ्य केंद्र  (अस्पताल) पहुंचाना, स्वस्थ हुए लोगों को वापसी घर छोड़ने जैसे काम विगत ढाई महीनों से बगैर विश्राम लिए कर रहे हैं. आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से इन एम्बुलेंस चालकों को आवास, भोजन और पानी सुविधाएं उपलब्ध हैं. क्योंकि विगत ढाई महीने से वे अपने परिवार व गांव से दूर हैं. रमेश भोये का कहना है कि  हमारी अटल स्वास्थ्य वाहिनी एम्बुलेंस सेवा द्वारा देश सेवा हो ऐसी हमारी कामना थी.

प्रतियोगी परीक्षाओं की कर रहे तैयारी

भले ये जोखिम भरा काम है, हर रोज नए अनुभव और प्रसंगों से सामना होता है.लेकिन हम दोनों भाई इसे गर्व के साथ और जी-जान लगाकर करते हैं. राष्ट्रीय आपदा में  आगे रहकर देश एवं देशवासियों के लिए काम करना गर्व की बात है.’  आदिवासी कोंकणी जनजाति से आए रमेश की शिक्षा साक्री तहसील के ही ग्राम चिपलीपाड़ा स्थित सरकारी आश्रमशाला में तथा गुलाब की शिक्षा ग्राम रोहोड़ के सरकारी आश्रमशाला में हुई. रमेश वर्तमान में डिप्लोमा फार्मेसी के अंतिम वर्ष में है. रमेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है ताकि सरकारी सेवाओं में शामिल होकर लोगों की सेवा कर सके.