Assembly session from today, Pilot will sit next to Gehlot, not next to him

    जयपुर. राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) गुट और सचिन पायलट (Sachin Pilot) गुट के बीच फिर से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कुछ दिन की खामोशी के बाद दोनों के समर्थक विधायकों का आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को पायलट गुट के सीनियर विधायक रमेश मीणा (Ramesh Meena) ने मुख्यमंत्री गहलोत पर हमला बोला है। इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री को पार्टी के दलित विधायकों की आवाज दबाने और सौतेला व्यवहार करने वाला बताया है। 

    विधायक मीणा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ” वे एक अस्पताल को टोकन मनी पर जमीन आवंटन में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना चाहते थे लेकिन नहीं उठा पाए।” मीणा यहीं नहीं रुके. उन्होंने गहलोत पर एक और आरोप  लगाते हुए कहा कि, “सत्ताधारी पार्टी के दलित विधायकों को विधासनभा के सदन में ऐसी सीटें दी जा रही हैं, जिन पर माइक नहीं।”

    ये संसदीय कार्य मंत्री का काम मेरा नहीं 

    मीणा ने यह बात स्पीकर सीपी जोशी की ओर देख कर बोल रहे थे, लेकिन उनके निशाने पर मुख्यमंत्री गहलोत थे, ये सभी जानते थे।  विधानसभा अध्यक्ष जोशी को भी पता था कि मीणा का निशाना कहां पर है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि कौन कहां बैठेगा। इसी के साथ उन्होंने कहा, किसकी सीट पर माइक है या नहीं, ये संसदीय कार्य मंत्री का काम है।” अपने विधायक के इस आरोप पर गहलोत सरकार ने तुरंत सफाई दी कि सभी को सदन में बोलने का अधिकार है, किसी को रोका नहीं गया।”

    ज्ञात हो कि, करीब 15 दिन पहले किसान आंदोलन के समर्थन में आयोजित किसान रैली को संबोधित करने गहलोत-पायलट एक साथ हेलिकॉप्टर से गए थे। उस समय यह समझा गया कि दोनों नजदीक आ रहे हैं,  लेकिन पायलट गुट के विधायक के इस आरोप के बाद साफ नजर आ रहा है कि दोनों नेताओं के बीच अविश्वास की खाई कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

    पायलट के समर्थन में बगावत करने वाले मंत्री 

    पिछले वर्ष राजस्थान में आए राजनीतिक संकट में मीणा का नाम बहुत बड़ा था। उन्हें सचिन पायलट का कट्टर समर्थक समझा जाता है। मीणा गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन जब पायलट ने बगावत की वह उस दौरान साथ में थे।  पायलट लगातार दबाब बना रहे हैं कि मीणा समेत मंत्रिमंडल से हटाए उनके कोटे के मंत्रियों को फिर मंत्री बनाया जाए.