Prakash Dhore

    पुणे. पीएमपी संचालक (PMP Operator) पद से भाजपा नगरसेवक शंकर पवार (BJP Corporator Shankar Pawar) के इस्तीफा देने से कई दिनों से यह पद रिक्त था। आख़िरकार सोमवार (Monday) की आम सभा ने भाजपा के ही प्रकाश ढोरे (Prakash Dhore) को संचालक पद पर देने पर मुहर लगाई गई। लेकिन अचानक ढोरे का नाम आगे आने की वजह से भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी बाहर आयी है।

    वर्षा तापकीर का नाम था चर्चा में ज्ञात हो कि पिछले कई महीने पहले प्रदेश भाजपा द्वारा उपमहापौर साथ ही सभागृह नेता बदल दिया गया। साथ ही महापौर को हटाने की भी मांग की जा रही थी। लेकिन महापौर डटे रहे, तो उधर पीएमपी संचालक को हटाने की भी मांग की जा रही थी। पीएमपी के पूर्व संचालक शंकर पवार पूर्व सांसद संजय काकड़े गुट के थे। जो इस्तीफा देने के लिए तैयार नहीं थे। आख़िरकार पार्टी के दबाव के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया। लेकिन कई दिनों तक यह पद रिक्त था। इसको लेकर महापौर, सभागृह नेता और पीएमपी के सीएमडी में झगड़ा भी हुआ था। चर्चा की जा रही थी कि यह पद वर्षा तापकीर को मिलेगा।  क्योंकि तापकीर स्थायी समिति के अध्यक्ष पद की मांग कर रही थी। लेकिन इसमें हेमंत रासने ने बाजी मार ली थी। तब तापकीर को पार्टी द्वारा आश्वस्त किया गया था कि आपको पीएमपी संचालक का पद दिया जाएगा।  लेकिन भाजपा ने अचानक से प्रकाश ढोरे का नाम सामने लाया। जो काकड़े गुट के है। इससे तापकीर को साइडलाइन करने की बात सामने आयी है। जिससे तापकीर नाराज है। क्योंकि उनके हाथ से दो पद छुट गए है। इससे अब भाजपा में लिप्त गुटबाजी भी सामने आ रही है।  

    लेना पड़ा मतदान

    आम सभा द्वारा पीएमपी संचालक नियुक्त करने से सम्बंधित पत्र पीएमपी द्वारा मनपा को दिया गया था। इसके अनुसार सोमवार की आम सभा के समक्ष यह प्रस्ताव था। नगरसचिव ने इसके लिए नाम देने की मांग राजनैतिक दलों से की। इसके अनुसार दो नाम आए। जिसमे एक था प्रकाश ढोरे और दूसरा था एनसीपी के वनराज आंदेकर। दो नाम आने की वजह से मतदान लेना पड़ा। जिसमें ढोरे को 96 अनुकूल मत मिले तो आंदेकर को 51. इसमें ढोरे की जित होने की घोषणा प्रभारी नगरसचिव शिवाजी दौंडकर द्वारा की गई।