स्वास्थ्य रक्षा सेवा अभियान में जुटे RSS कार्यकर्ता

पुणे. जब से कोरोना संक्रमण की चेन रोकने के लिए लॉकडाउन घोषित किया गया है, तभी से पुणे में कोरोना के खिलाफ इस जंग में संघ के कार्यकर्ता लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करने में जुटे हैं.

जरुरतमंदों को भोजन पहुंचा रहे हैं. आरोग्य रक्षा सेवा अभियान के तहत 1016 कार्यकर्ता हॉटस्पॉट जोन में जाकर कोरोना संक्रमित मरीजों की खोज कर रहे हैं. इसके अलावा तकरीबन 2164 कार्यकर्ताओं ने पुणे के अलग-अलग इलाके में ब्लड डोनेशन कैंप लगाया, जहां पर एकत्रित किए गए ब्लड को कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए दिया जाएगा.

अब तक एक लाख से अधिक की स्क्रीनिंग

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव करने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता भी जुट गए हैं. पुणे में आरएसएस के 1016 स्वयंसेवक, कार्यकर्ताओं ने 27 अप्रैल से अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग की. यह स्क्रीनिंग पुणे के सबसे ज्यादा प्रभावित यानि 168 हॉटस्पॉट जोन में की गई. संघ की ओर से दावा किया गया है कि यह देश में संभवत: पहली बार है, जब संघ स्वयंसेवक प्रशासन के साथ इस तरह से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का काम कर रहे हैं. संघ के इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से अब तक करीब 37 लाख लोगों तक राशन पहुंचाया गया. उनके दावे के मुताबिक 25 मार्च से अब तक पुणे में 37 लाख लोगों तक खाने के पैकेट्स और राशन पहुंचाए गए हैं.

सोसाइटियों के घर-घर जा कर पीड़ितों की तलाश

पुणे महानगर के संघचालक रवींद्र वंजारवाडकर ने बताया कि आरोग्य रक्षा सेवा अभियान के तहत कार्यकर्ता हर रोज सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक अलग-अलग इलाकों में स्क्रीनिंग का काम करते हैं. इस दौरान वे पूरी तरह से पीपीई किट और मास्क से लैस रहते हैं. उनके साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी रहती है. कार्यकर्ता हर सोसाइटी में जाकर वहां एक-एक सदस्य की स्क्रीनिंग करते हैं, उनसे बात करके उनकी ट्रैवल हिस्ट्री नोट करते हैं और संदिग्ध पाए जाने पर उस व्यक्ति को हॉस्पिटल जांच के लिए भेजने का काम करते हैं. इस तरह अब तक तकरीबन एक लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है. उन्होंने बताया कि इस अभियान में 1900 से अधिक नागरिकों मे कोरोना के लक्षण पाए गए हैं. इन्हें टेस्ट और उपचार के लिए महापालिका के हॉस्पिटल तक पहुंचाया गया है. संघ कार्यकर्ता पीपीई किट पहनकर हर दिन सुबह 9 बजे से 2 बजे तक इस अभियान का हिस्सा बनते हैं.

लोगों से जानकारी निकालना कठिन काम है

रविंद्र वंजारवाडकर ने बताया कि यह सारा प्रयास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जन कल्याण समिति, पुणे महानगरपालिका और पीपीसीआर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इतने लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान कई जगह पर उन्हें लोगों को मनाना और उनकी सही हिस्ट्री निकालना काफी दिक्कत का काम रहा. लोग डर के कारण अपनी सही हिस्ट्री या अपने अंदर हुई बीमारी को नहीं बताते हैं. ऐसे में हम सबसे पहले उनके मन के डर को दूर करने का काम करते हैं. अब लोग काफी जागृत हो गए है और किसी में कोई सिमटम्स दिखाई देने पर लोग स्वयं फोन कर जानकारी दे रहे हैं.

 तीन-तीन-तीन प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा संघ

रवींद्र वंजारवाडकर ने बताया, इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का सफलतापूर्वक समापन हो चुका है और अब हम तीन-तीन-तीन नाम से एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहे हैं. इसमें 3 डॉक्टर, सप्ताह में 3 दिन, 3 इलाकों में जाकर ट्रेनिंग और जांच का काम करेंगे. इनके सहयोग के लिए सैकड़ों कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों में तैनात रहेंगे. अपने प्रोजेक्ट को और सफल बनाने के लिए हम स्थानीय जिला प्रशासन से भी मदद ले रहे हैं.