यह शक्तिपीठ तांत्रिक पूजा के लिए है प्रसिद्ध, महिमा है अपरंपार

    -सीमा कुमारी

    ये तो सभी जानते हैं कि भारत विभिन्न सभ्यता एवं संस्कृति वाला देश है। यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ शांतिपूर्वक रहते हैं। यहां की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं। वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है, वह है भारत के प्राचीन मंदिर।

    मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं। इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं, जो कई हजार साल पुराने हैं, और, जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय होता है। आइए जानें ऐसे ही मंदिरों के बारे में-

    कामख्या देवी मंदिर-

    कामाख्या मंदिर भारत में सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, और स्वाभाविक रूप से, सदियों का इतिहास इसके साथ जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण आठवीं और नौवीं शताब्दी के बीच हुआ था।

    कामाख्या देवी मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर स्थित है। कामाख्या मंदिर भारत का प्रसिद्ध मंदिर है। इक्यावन शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है, जो एक पहाड़ी पर बना है और इसका तांत्रिक महत्व भी है।

    माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को चक्र से काटा तब इस स्थान पर उनकी योनि कट कर गिर गयी। इसी मान्यता के कारण इस स्थान पर देवी की योनि की पूजा होती है। प्रत्येक महीने 3 दिनों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता है। माना जाता है कि माँ कामाख्या इस बीच रजस्वला होती हैं। और उनके शरीर से रक्त निकलता है। इस दौरान शक्तिपीठ की अध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए देश के विभिन्न भागों से यहां तांत्रिक और साधक जुटते हैं। आस-पास की गुफाओं में रहकर वह साधना करते हैं।

    चौथे दिन माता के मंदिर का द्वार खुलता है। माता के भक्त और साधक दिव्य प्रसाद पाने के लिए बेचैन हो उठते हैं। यह दिव्य प्रसाद होता है- लाल रंग का वस्त्र, जिसे माता रजस्वला होने के दौरान धारण करती हैं। माना जाता है वस्त्र का टुकड़ा जिसे मिल जाता है उसके सारे कष्ट और विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं।

    माता की शक्ति में जो लोग विश्वास करते हैं, वह भी यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं। जिन्हें ईश्वरीय सत्ता पर यकीन नहीं है, वह भी यहां आकर माता के चरणों में शीश झुकाते हैं और देवी के भक्त बन जाते हैं।