आज है ‘कोकिला व्रत’, जानें इसकी महिमा

    -सीमा कुमारी

    हिन्दू धर्म में ‘आषाढ़ पूर्णिमा’ के दिन पड़ने वाले ‘कोकिला व्रत’ का बड़ा महत्व है। पंचांग के अनुसार,  ‘कोकिला व्रत’ (Kokila Vrat)  23 जुलाई, यानी कल शुक्रवार को है। यह व्रत हर साल आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है।

    शास्त्रों के अनुसार, ‘कोकिला व्रत’ सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला व्रत माना गया है। इस व्रत का महत्‍व कुंवारी कन्‍याओं के लिए बहुत शुभ होता है। कहा जाता है कि इस व्रत को सच्चे मन से रखने पर उन्‍हें योग्‍य वर की प्राप्‍ति होती है।

    विवाहित महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत में आदिशक्ति के स्वरूप कोयल की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।  इसके अलावा, शादी में आ रही बाधा दूर हो जाती है और योग्य वर मिलता है। खासकर, कुंवारी कन्‍याओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। आइए जानें ‘कोकिला व्रत’ कब है ? और इसकी महिमा:

    शुभ मुहूर्त:

    कोकिला व्रत- 23 जुलाई 2021, शुक्रवार को

    ‘कोकिला व्रत’ पूजा:

    मुहूर्त- प्रात: 07 बजकर 17 मिनट से रात्रि 09 बजकर 22 मिनट तक।

    अवधि- 02 घण्टे 04 मिनट

    पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ:

    23 जुलाई 2021, शुक्रवार को प्रात: 10 बजकर 43 मिनट।

    पूर्णिमा तिथि समाप्त:

    24 जुलाई 2021, शनिवार को प्रात: 08 बजकर 06 मिनट।

    ‘कोकिला व्रत’ का महत्व:

    हिंदू धर्म में ‘कोकिला व्रत’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुयोग्य वर पाने की कामना पूरी होती है। इसलिए  इस व्रत को कुवांरी कन्‍याओं के लिए बहुत ही शुभ माना गया है। वहीं सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए भी इस व्रत को रखती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव की आज्ञा का उल्लघंन कर दिया।  जिससे नाराज होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को कोकिला पक्षी (कोयल) होने का श्राप दे दिया। श्राप के कारण वह कई वर्षों तक कोकिला पक्षी के रूप में नंदन वन में वास करती है। अगले जन्म में पार्वती जी ने इस व्रत को नियम पूर्वक पूर्ण किया। इस व्रत से प्रसन्न होकर शिव जी ने श्राप के प्रभाव को दूर किया।

    इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। वहीं दांपत्य जीवन में आने वाली परेशानियां भी दूर होती हैं।  सुहागिन और कुंवारी कन्याएं इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से पूर्ण करती हैं। ये व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है।