उम्र का नहीं कोई ठिकाना कभी बढ़ जाना तो कभी घट जाना

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के हलफनामे हैरत में डालने वाले हैं. उनमें किसी की उम्र 5 वर्षों में घट गई तो किसी की आयु 5 वर्ष में एकदम से 10 साल बढ़ गई. इसके अलावा किसी प्रत्याशी की उम्र वहीं ठिठक कर रह गई जहां 5 साल पहले थी.’’ हमने कहा, ‘‘किसी की उम्र पर मत जाइए, उम्र सिर्फ आंकड़ा या नंबर है, इससे अधिक कुछ नहीं! व्यक्ति की उम्र वह मानी जानी चाहिए जैसा कि वह खुद को महसूस करता है. कुछ लोग उम्र से पहले बूढ़े हो जाते हैं तो कुछ कहते हैं- देख इधर देख तेरा ध्यान कहां है, सिर में बुढ़ापा है मगर दिल तो जवां है.’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, उम्र का हर जगह महत्व है, जैसे- स्कूल में दाखिले की उम्र, ड्राइविंग लाइसेंस व मतदान का अधिकार हासिल करने की उम्र, शादी-ब्याह की उम्र, रिटायरमेंट की उम्र. विधायक बनने के लिए न्यूनतम 25 साल की उम्र होनी चाहिए. राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कम से कम 35 साल का होना चाहिए. उम्र की जीवन में अहमियत है तभी तो फारूक अब्दुल्ला ने अपने बेटे का नाम उमर रखा. फिल्मों में गीत है- तुम्हें और क्या दूं मैं दिल के सिवाय तुमको हमारी उमर लग जाए. एक अन्य गीत है- घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तोरे आगे, उमर मोरी बाली, शरम मोहे लागे.’’ हमने कहा, ‘‘जब अपने देश में साक्षरता की कमी थी तो लोग जन्म तारीख को लेकर कन्फ्यूज रहा करते थे. तब कहा जाता था कि यह नागपंचमी, दिवाली या होली के 2 दिन बाद या 4 दिन पहले पैदा हुआ.

कुछ माताएं एक डिब्बी में डोरी रखती थीं और बेटे के हर जन्मदिन पर उसमें एक गांठ बांधकर फिर से डिब्बी में डाल देती थीं. मतलब किसी की उम्र जानना है तो गांठों को गिन लें.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, बिहार के चुनाव में उम्र का घोटाला नजर आ रहा है. बइहरा के राजद उम्मीदवार सरोज यादव ने 2015 के चुनाव में अपनी उम्र 33 वर्ष बताई थी. अभी 2020 के चुनाव में उनकी आयु 38 वर्ष होनी चाहिए लेकिन उन्होंने अभी अपनी उम्र 30 वर्ष बताई है. इसी तरह 1950 में जन्मे जदयू उम्मीदवार सत्यदेव ने अपनी उम्र 56 वर्ष बताई है जो कि वास्तव में 70 वर्ष होनी चाहिए. एक ज्ञानेंद्रसिंह ज्ञान हैं जिन्होंने 2015 के चुनाव में अपनी उम्र 51 वर्ष बताई थी और अब अपनी आयु 61 वर्ष बता रहे हैं. पता नहीं, 5 वर्ष में उनकी उम्र 10 साल कैसे बढ़ गई?’’ हमने कहा, ‘‘उम्र का मामला बड़ा जोखिम भरा है. शराफत का तकाजा है कि किसी महिला से उसकी उम्र बिल्कुल नहीं पूछनी चाहिए. किसी के हसीन चेहरे से उसकी उम्र का अंदाजा ही नहीं लगता. उत्साही और जिंदादिल लोग बढ़ती उम्र को खुद पर हावी नहीं होने देते. उम्मीदवारों की बात छोड़िए, नाउम्मीद लोगों के लिए यह शेर है- उम्रेदराज मांग के लाए थे चार दिन, दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में!’