अकड़ को कोरोना ने मिटाया, रावण का कद घटाया घोर कलियुग की माया

    रावण की ऊंची-पूरी पर्सनालिटी को कद्दावर कोरोना ने छोटा करके रख दिया. इस बार विजयादशमी को कई जगह रावण दहन की परमिशन नहीं दी गई और अन्य स्थानों पर उसका आकार लघु कर दिया गया. इससे रावण भी डिप्रेशन में आ गया होगा. पहले लोग रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के बड़े-बड़े पुतले देखने आते थे और शाम होने की प्रतीक्षा करते थे कि जलता हुआ रामबाण सीधे रावण की छाती में लगेगा और उसमें भरे बारूदी पटाखे फूटने से बांस की कमची व गत्ते से बना रावण धू-धू करके जल जाएगा.

    कोविड प्रोटोकाल रावण के पुतले के लिए काल बन गया. त्रेतायुग के रावण को समझ में आ गया कि अब उससे भी बड़े-बड़े जीते जागते रावण पैदा हो गए हैं गली के गुंडे से लेकर नेता तक की शक्ल में! भ्रष्टाचारी रावण, दुराचारी रावण! राजनीति और शासन-प्रशासन की सोने की लंका में बैठे उसी प्रवृत्ति के दशानन. रावण लंका तक ही सीमित नहीं रह गया. वह चीन और पाकिस्तान के शासकों, तालिबानियों और आतंकियों की शक्ल में भी मौजूद है आखिर कब और कैसे हो पाएगा इतने कलयुगी रावणों का वध! शाम ढल रही है और रावण बेसब्री से राम का इंतजार करने पर मजबूर है! अब रावण दहन सिर्फ कर्ममांड रह गया है. अपने मन में बैठे कुमार्गी रावण को क्या कोई आज तक मार पाया है?