सोनिया का वर्चस्व साबित, ठंडे पड़ गए जी-23 नेता

    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को खुली चिट्ठी लिखकर पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग करनेवाला जी-23 नेताओं का गुट यदि अपनी आलोचना की धार खो बैठा तो उसकी मजबूरी भी गौर करने लायक है. गांधी परिवार का कांग्रेस कार्य समिति, अ.भा. कांग्रेस कमेटी, प्रदेश कांग्रेस कमेटियों, जिला कांग्रेस कमेटियों में वर्चस्व है. कांग्रेस कार्यसमिति के सभी सदस्य सोनिया गांधी द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. जिनकी निष्ठा सोनिया के प्रति रहती है, केवल उन्हें ही नामांकित किया जाता है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई निर्वाचित सदस्य के रूप में सामने न आने पाए जिसे कांग्रेस अध्यक्ष नियंत्रित या निष्कासित न कर सकें. कांग्रेस कार्य समिति में आमंत्रित सदस्य भी अध्यक्ष के प्रति वफादार नेता ही होते हैं, इसलिए असहमति या विरोध का सुर उठ ही नहीं सकता. सोनिया गांधी ने केवल स्थायी सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की बैठक बुलाने की परिवर्तनवादियों की मांग ठुकरा दी. यदि ऐसा होता तो 20 सदस्य बैठक में आते जिनमें 17 वफादार तथा परिवर्तन की मांग करने वाले 3 सदस्य (गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक) रहते. सोनिया गांधी ने जानबूझकर विस्तारित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाई जिसमें 36 आमंत्रित सदस्य थे. इस तरह कुल 56 सदस्यों की बैठक में 53 लोग पूरी तरह उनके पक्ष में थे और जी-23 गुट के 3 ही सदस्य रह गए थे. यदि उनमें से कोई भी आवाज उठाता तो सोनिया समर्थक उन पर बहुत भारी पड़ जाते और असहमति की आवाज कुचल दी जाती.

    प्रियंका की सूझबूझ

    माना जा रहा है कि इस तरह की रणनीति के पीछे प्रियंका गांधी की सूझबूझ है. उन्होंने जी-23 गुट के नेताओं को संदेश दिया कि पार्टी हितों व नीतियों के समर्थकों को पार्टी में महत्व दिया जाएगा और जो पार्टी के नियमों व अनुशासन की अनदेखी करेगा, उसे बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं की जाएगी. प्रियंका ने पार्टी के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उन्हें प्रथम पंक्ति में सोनिया गांधी के साथ स्थान दिया गया जिससे उन्हें यह न लगे कि उन्हें पहले की तरह सम्मान नहीं दिया जा रहा. इसके पहले राष्ट्रपति से मिलने गए कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल में भी गुलाम नबी आजाद को शामिल किया गया था. इन सारी बातों का नतीजा यह निकला कि आजाद ने पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग को छोड़कर पार्टी और सोनिया गांधी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि वह पार्टी के सिपाही हैं. इसी तरह जी-23 के अन्य नेता आनंद शर्मा को भी साधने का प्रयास किया गया. शर्मा ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में प्रियंका गांधी की सराहना करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी प्रकरण में कांग्रेस जनता की आवाज उठाने में सफल रही है. वहां प्रियंका ने बेहतर तरीके से पार्टी को नेतृत्व किया.

    कोई चुनौती नहीं दे सकता

    जिन कांग्रेस कार्यसमिति सदस्यों और मुख्यमंत्रियों ने गांधी परिवार को पूरा समर्थन दिया, उन्हें पार्टी किसी न किसी रूप में उपकृत करेगी. ऐसे विश्वसनीय लोगों का अगले संगठन चुनावों में ध्यान रखा जाएगा. 2 लोकसभा चुनावों में हार के बाद भी कांग्रेसजन गांधी परिवार को चुनौती नहीं दे पा रहे हैं, बल्कि वे इस परिवार से आगे सोच पाने में भी विफल हैं. पार्टी अध्यक्ष को लेकर राहुल गांधी का रवैया कुछ ऐसा है कि न खुद पार्टी प्रेसीडेंट बनूंगा, न किसी अन्य को बनने दूंगा. जी-23 गुट का कोई भी नेता मोरारजी देसाई, देवराज अर्स या वीपी सिंह जैसा प्रभावशाली नहीं है कि गांधी परिवार के वर्चस्व को चुनौती दे. कोई शरद पवार जैसे तेवर भी नहीं दिखा सकता जिन्होंने पीए संगमा और तारिक अनवर को साथ लेकर सोनिया से पंगा लिया था और अलग पार्टी बनाई थी.