वन्य जीवों के शिकार के लिए पानी में यूरिया मिलाया; नीलगाय, मृग, बंदरों की मौत

    • तीन गिरफ्तार, आलेगांव वन परिक्षेत्र की घटना 

    अकोला. वन्यजीवों के शिकार के लिए एक तालाब में यूरिया मिलाने से 12 बंदरों, 1 नीलगाय, 1 मृग और 2 पक्षियों की दर्दनाक मौत का खुलासा हुआ है. मामले में वन विभाग ने शुक्रवार की देर रात तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आलेगांव वन परिक्षेत्र के अंतर्गत हुई इस घटना से वन विभाग में हड़कंप मच गया है. आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत करने पर उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

    आलेगांव वन परिक्षेत्र के अंतर्गत पिंपली बीट नंबर 1 के आरक्षित वन क्षेत्र में वन्य जीव मृत पाए गए. इस संबंध में वन विभाग ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया. घटना स्थल का निरीक्षण करने पर पता चला कि शिकार के उद्देश्य से नीलगाय के पिछले पैर काट दिए गए थे. इसी तरह खून से सने हथियार भी पास के एक खेत में मिले हैं. वन विभाग ने घटना की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच शुरू कर दी है. इस प्रकरण में मधुकर लाठाड़, गोविंद ससाणे, संतोष ससाणे इन तीन आरोपियों को उनके घर से और खेत से हिरासत में लिया गया है.

    इस समय आरोपियों के पास से शिकार के लिए उपयोग में लायी जानेवाली सामग्री भी बरामद की गई है. जंगली जानवरों का शिकार करने के उद्देश्य से आरोपियों ने पानी में यूरिया डालने के बाद बारह बंदर, एक नीलगाय, एक मृग और दो पक्षियों की जान चली गई. जिसके बाद उप वन संरक्षक के. अर्जुना, सहायक वन संरक्षक सुरेश वाडोटे के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी विश्वनाथ चव्हाण, दादाराव इंगले, पिंपलडोली के वनपाल थोरात, लखन खोकड़, सालवे, बिडकर, जाधव, इंगले आदि ने कार्रवाई की है. वन रेंज अधिकारी विश्वनाथ चव्हाण मामले की आगे जांच कर रहे हैं.

    मामले की जांच जारी

    आलेगांव वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एक तालाब के पानी में यूरिया फेंक कर नृशंस तरीके से वन्य जीवों और पक्षियों की हत्या कर दी गई. आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पास से अवैध शिकार सामग्री भी जब्त कर ली गई. क्या इस जलाशय का पानी पीने से कोई और जानवर की मौत हुई है? इसकी जांच चल रही है.-विश्वनाथ चव्हाण, वनपरिक्षेत्र अधिकारी, आलेगांव.

    मृतक जानवरों की संख्या बढ़ने की संभावना 

    चूंकि मानसून अभी शुरू नहीं हुआ है, इसलिए वन्यजीव कुछ जल निकायों पर ही अपनी प्यास तृप्त करते हैं. शिकारी इसे देखते ही ठीक यही करते हैं. पानी में यूरिया मिलाने से 12 बंदर, एक नीलगाय और एक मृग समेत दो पक्षियों की मौत हो गई है. लेकिन उन वन्यजीवों या पक्षियों का क्या जो इस जलाशय का पानी पीने और कहीं और जाने के बाद मर जाते हैं? इसलिए इस संख्या के बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. विशेष रूप से, बंदरों में कुछ बंदरों के बच्चे भी शामिल थे.