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    दुर्गापुर: विभिन्न मांगों के साथ ही मुख्य मांगें राज्य सरकारी विभाग में विलय को लेकर एस टी कर्मियों के पिछले 50 दिनों से चले आ रहे हड़ताल से यात्रियों को खास ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जिले सहित राज्य भर में परिवहन विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बसेस बंद है. इससे स्थानीय सहित अंतरजिला यात्रियों का आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.  

    आम जनता की समस्या को हल करने पर दे प्राथमिकता-विलास टेंभूर्णे 

    पूर्व जिलापरिषद सदस्य विलास टेंभुर्णे ने कहा कि राज्य परिवहन विभाग के हड़ताल से महाविद्यालयिन छात्रों, शादी व अन्य कार्यक्रमों के लिये आवागमन करने वालों के लिये इन दिनों प्राइवेट बसेस व चार पहिया वाहन ही एक मात्र रास्ता बचा हुआ है.  इससे यात्रियों को समय और  पैसा दोनों का नुकसान हो रहा है. जिस रूट में प्राइवेट गाड़ियां नही चलती ऐसे सुदूर क्षेत्र में जाने के लिए गाड़ी रिजर्व कर के जाने से यात्रियों को कई गुणा पैसे खर्च हो रहे है. सरकार को इसे प्राथमिकता से हल करनी चाहिये. 

    गंतव्य स्थान पर पहुचना हो रहा मुश्किल- दीपक पाठक

    सुमित्रा नगर तुकुम वासी दीपक पाठक ने कहा कि, एसटी कर्मियों व सरकार के बीच नूरा कुश्ती का ही नतीजा है कि हड़ताल 50 दिन पुराना होने जा रहा है. इससे हम जैसे सेल्फ एम्प्लाईयों के लिए एक शहर से दूसरे शहर और गाँव जाने के लिए काफी मशक्क्त करना पड़ रहा है. काली पीली जीप,ऑटो ,निजी बस जैसे वाहनों से जैसे तैसे अधिक किराया देकर आवाजाही कर पा रहे है. इससे समय पर पहुँच पाना भी मुश्किल हो रहा है. 

    छात्रों के लिए दूसरा विकल्प ढुंढे- रोहित सिंह

    दुर्गापुर वासी और एम कॉम के छात्र रोहित सिंह ने एस टी हड़ताल के संबंध में कहा कि एस टी बसेस का किराया कम रहने  तथा समय से चलने से  कॉलेज जाना हो या गोंडवाना यूनिवर्सिटी हम जैसे छात्र एस टी से ही आना जाना किया करते थे. लेकिन एस टी की हड़ताल रहने से गोंडवाना यूनिवर्सिटी में काम रहने के बावजूद नहीं जा पा रहे है. सरकार को चाहिए हड़ताल रहने तक छात्रों के लिये कोई विकल्प दें, ताकि आई कार्ड दिखाकर कम पैसे में आवाजाही किया जा सके. 

    मरिजों के लिए दवाई से महंगा हो रहा परिवहन – गोसाईं आत्राम

    दुर्गापुर वासी और पेशे से आर्यवेदिक चिकित्सक गोसाईं आत्राम ने एस टी हड़ताल के बारे में बताया कि इससे गरीब मरीजों पर खास ही असर पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि मेरे पास दूर दूर से गरीब मरीज अपनी बीमारी के वजह से आते है. एस टी हड़ताल के वजह से सुदूर और ग्रामीण क्षेत्र के मरीज इस लिए इलाज कराने नहीं आ पा रहे है कि उनके पास रिजर्व गाड़ी करने के पैसे नहीं है. दवा तो सस्ती है परन्तु ग्रामीण क्षेत्र में बस नहीं चलने से प्राइवेट परिवहन महंगा पड़ रहा है. एस टी के हड़ताल से ग्रामीणों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। गरीब ग्रामीणों को पैदल ही यात्रा करना पड़ रहा है.