dengue

    भंडारा. अस्वच्छता के कारण बीमारियां होती हैं, यह जानते हुए भी नगर परिषद की ओर से कीटनाशकों का छिड़काव न किए जाने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है. जिला के साथ-साथ शहर में कीटाणु जन्य बीमारियों ने लोगों को जकड़ लिया है. डेंग्यु, मलेरिया तथा अन्य विषाणु जन्य बीमारियों से लोग परेशान हैं. डेग्यु से पिछले सप्ताह दो लोगों की मौत भी हो चुकी है, फिर भी शहर में स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. भंडारा शहर में तो कीटनाशक धुएं का छिड़काव भी नहीं किया गया है. 

    कोरोना महामारी में जीवन और मौत को बीच जूझते लोगों के बीच से यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भंडारा नगर परिसर का संबधित विभाग इस ओर ध्यान देगा कि नहीं.

    मौसम के बदलाव की वजह से भयंकर गर्मी सहन कर रहे लोगों को उस वक्त सुकून जरूर मिला लेकिन लेकर गंदगी के कारण संक्रामक रोगों में वृद्धि होने लगी और आज नतीजा यह कि जिले में डेंग्यु- मलेरिया के मरीजों की संख्या में वृद्धि होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. डेंग्यु के 36 तथा मलेरिया के 4  मरीज पाए जाने के बाद जनता से विशेष सर्तकता बरतने के निर्देश तो दिए गए हैं, लेकिन नगर परिषद का स्वच्छता विभाग इल ओर ध्यान नहीं दे रहा है. जिला सामान्य असपताल समेत जितने भी निजी अस्पताल हैं, वहां मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. 

    भंडारा शहर में मच्छरों की संख्या में लगातार वृद्धि होने की वजह से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी है. जिला प्रशासन की ओर से जनता को लगातार जागरुक तो किया जा रहा है, लेकिन नगर परिषद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है. गदंगी दूर करने के बारे में गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया जा रहा, इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है.

    सामाजिक संगठनों ने भी शहर की गंदगी को लेकर चिंता जतायी है और हर वार्ड के नगरसेवक से अपील की है कि वे स्वयं अपने वार्ड की गंदगी को दूर करने की कोशिश करें. जाय आफ गिविंग के नितीन दुरगकर, डा नितीन तुरस्कर तथा अन्य पदाधिकारियों ने शहर को साफ-सुथरा बनाने की मांग की है.