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    भंडारा. राज्य के सभी विद्यालयों में मराठी भाषा के शिक्षण एवं अध्ययन के संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने 16 नवंबर को पत्र जारी कर मराठी पढ़ाने वाले विद्यालयों पर अधिनियम 2020 के तहत सख्ती का विषय के रूप में कार्रवाई करने की जानकारी दी है.

    राज्य के सभी विद्यालयों में मराठी भाषा के अध्ययन एवं अध्ययन को सख्त बनाने के लिए 9 मार्च, 2020 को सरकारी अधिसूचना जारी कर शैक्षणिक वर्ष 2020_22 से कक्षा 1 से 10 तक मराठी भाषा की सख्ती का शिक्षण एवं अध्ययन शुरू किया गया है.

    शासन स्तर से बार-बार इसका मसौदा तैयार किया जा रहा है. तद्नुसार अपने कार्यक्षेत्र में मराठी भाषा के अध्ययन एवं अध्यापन में सख्ती के संबंध में अधिनियम 2020 के तहत सख्ती के विषय के रूप में पढ़ाने वाले स्कूलों पर अधिनियम की धारा 12 के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. भले ही मराठी महाराष्ट्र राज्य की आधिकारिक भाषा है, लेकिन अंग्रेजी स्कूलों द्वारा दिखाई गई उपेक्षा चिंता का विषय है. लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. 

    मराठी सिखाई जानी चाहिए

    मराठी अपनी मातृभाषा है, इसलिए अंग्रेजी स्कूलों में भी मराठी विषय पढ़ाना आवश्यक है. लेकिन अब मराठी की उपेक्षा करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई शुरू होने के साथ ही मराठी विषयों की पढ़ाई शुरू हो गई है. स्कूलों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना व होनेवाली बदनामी को देखते हुए मराठी विषय पढाने में शुरूआत हुई है. 

    1 लाख रुपये तक का जुर्माना

    अगर अंग्रेजी स्कूलों में मराठी विषय नहीं पढ़ाया जाता है तो उन स्कूलों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इस कारण जुर्माने का सामना नहीं करना पडे, इसलिए अब अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में मराठी विषय पढ़ाने की उम्मीद है. कई अंग्रेजी स्कूलों में मराठी विषय नहीं पढ़ाया जाता है.

    मराठी नहीं पढ़ाते तो करे शिकायत 

    यदि अपने बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे हैं, वहां कक्षा 10 तक मराठी विषय नहीं पढ़ाया जाता है, तो माता-पिता को उन स्कूलों के बारे में समूह शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षा अधिकारी से शिकायत करनी चाहिए. ताकि वह बच्चों को मराठी विषय पढा सके.