विधवा भाभी से देवर की शादी

    भंडारा. बड़े भाई की सात महीने पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद विधवा हुई भाभी ढाई साल के भतीजे का भविष्य का खयाल करते हुए उन दोनों को स्वीकार करने का प्रशंसनीय उठाते हुए विधवा भाभी एवं देवर की शादी कर समाज के समक्ष आदर्श स्थापित हुआ है. तुमसर तहसील के एक छोटे से गाँव खापा के बुरडे परिवार की उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए सराहना की जा रही है.

    तीन साल में बिखर गया संसार

    तीन साल पहले स्व. योगेश एवं विशाखा की शादी हुई थी. इससे विशाखा को बेटा भी हुआ. सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था. इसी बीच पिछले साल सितंबर में दहेगांव में तुमसर-भंडारा राज्य महामार्ग पर योगेश बुरडे का एक्सीडेंट हो गया था. इलाज के दौरान योगेश ने दम तोड़ दिया. योगेश की मौत ने पूरे बुरडे परिवार को झकझोर कर रख दिया. उसकी पत्नी, ढाई साल के बेटा के भविष्य अंधकारमय हो गया. युवावस्था में विशाखा का सुहाग छिन चुका था.  वह विधवा के रूप में अपनी सास, ससुर एवं देवर के साथ रह रही थी.

    ससूर की प्रशंसनीय पहल

    मृतक योगेश के पिता किसना बुरडे ने कहा कि उनकी बहू को समाज में विधवा के तौर पर रहने की बजाए बेटी एवं बहु की तरह ही रहेगी. वे चाहते थे कि उनके माथे पर सिंदूर फिर से दिखे. पोते का भविष्य भी सुनिश्चित हो. इसी विधायक सोच का बल मिला एवं उन्होने अपने छोटे बेटे के साथ विधवा बहु के विवाह का प्रस्ताव परिजनों के समक्ष रखा. सभी की राय थी कि उनकी शादी विधवा बहु की सहमति से होनी चाहिए.

    इसके बाद इस शादी का प्रस्ताव छोटे बेटे विजय के साथ बहू विशाखा एवं उसके माता पिता के समक्ष रखा गया. शादी के लिए सभी राजी होने के बाद मोहाडी के चौंडेश्वरी माता मंदिर में रिश्तेदारों की मौजूदगी में विवाह समारोह संपन्न हुआ. विजय ने विशाखा के माथे पर कुमकुम लगाकर एवं गले में मंगलसूत्र बांधकर उसे अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इस सामाजिक संदेश दे रही शादी ने ढाई साल के बेटा को पिता का साया भी वापस मिल गया.

    पति के विरह में जीवन जी रही विशाखा की आंखों में अच्छे भविष्य की आशा फिर से बंध गयी है. एक विधवा भाभी से शादी करने एवं उसके बच्चे का स्वीकार कर विजय ने समाज के सामने एक आदर्श स्थापित किया है एवं बुरडे परिवार की इस सोच की प्रशंसा की जा रही है.