रामाला को बचाने इको प्रो का मूक प्रदर्शन, मेरी वसुंधरा अभियान में शामिल करने की मांग

  • जिले में एकमात्र गोंडकालिन तालाब 

चंद्रपुर: प्रदूषण के चलते अपना अस्तित्व खोते जा रहे जिले के एकमात्र गोंडकालिन रामाला तालाब को गहरा करने और इसके सौंदर्यीकरण की मांग को लेकर इको प्रो के सदस्यों ने रामाला तालाब के किनारे एकत्रित होकर मूकप्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में इको प्रो संस्था की पर्यावरण विंग के सदस्यों के अलावा तालाब में नियमित तैराकी के लिए आनेवाले नागरिक एवं स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए. इको पो संस्था के अध्यक्ष बंडू धोतरे एवं इको प्रो पर्यावरण विंग के प्रमुख नितीन रामटेके के नेतृत्व में मूक प्रदर्शन किया गया. 

इस समय मूक प्रदर्शन में सम्मिलित सदस्यों ने हाथों में विभिन्न मांगों का बैनर लेकर तालाब के किनारे खड़े होकर नागरिकों ध्यान केन्द्रित किया. लगभग दो घंटे चले इस प्रदर्शन में वसुंधरा अभियान अंतर्गत रामाला तालाब का संवर्धन करें, रामाला तालाब प्रदूषणमुक्त करे, रामाला तालाब को गहरा करे, तालाब के आसपास किले के दीवार की लताओं को निकलाकर संरक्षित करें, वेकोलि का बेकार जानेवाला पानी तालाब में छोड़े, तालाब में आनेवाला नागरिकों का गंदा पानी रोके, रामाला तालाब से जुड़े मच्छीनाले को अलग करें, जलनगर के बाजू से सुरक्षा दीवार का निर्माण करें, रामाला तालाब के उत्तर की ओर गंदेपानी के शुध्दिकरण का संयंत्र लगाया जाए, किले की दीवार का निर्माण करे आदि मांगों का समावेश था.

मूक प्रदर्शन में चंद्रपुर के नागरिक रमेश बोथरा, एड. रवींद्र वर्मा, मजहर अली, राखी बोराडे, अरूण गोवारदीपे, दत्ता सरोदे, अनिल अडगुरवार, सूरज गुंडावार, इको प्रो सदस्य जितेंद्र वालके, सुधीर देव, सुनील लिपटे, धमेंद्र लुनावत, सौरभ शेटे, राजू काहीलकर, अमोल उट्टलवार, किनारा खोब्रागडे, सचिन धोतरे, राजेश व्यास, संजय सब्बनवार, सुनील पाटिल, अमित आवारी अभय अमृतकर, प्रमोद मलिक, गौरव वाघडे, आकाश घोडमारे आदि शामिल थे.

इससे पूर्व इको प्रो संस्था की ओर से रामाला तालाब को गहरा करने के बारे में प्रशासन को निवेदन देकर प्रशासन का कुछ मुद्दों पर ध्यान आकर्षण किया गया. इसमें मच्छीनाले का गंदा पानी सीधे तालाब में आता जिससे गंदे पानी में पनपनेवाली अनेक जलीय वनस्पति बढ रही है, तालाब के आसपास के नागरिकां को तालाब के गंदे पानी की बदबू का सामना करना पड़ता है, वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट की आवश्यकता के बावजूद यहां इसकी व्यवस्था नहीं हुई है. नागरिकों के घरों का गंदा पानी सीधे तालाब में जा रहा है.,

मालधक्का में रासायनिक खाद की लोडिंग अनलोडिंग की जाती है जमीन पर गिरा हुआ यूरिया, सल्फेट आदि खाद बारिश के पानी में मिलकर तालाब तक पहुंचता है, तलाब के पश्चिम में अतिक्रमण अब भी कायम है सुरक्षा दीवार अब तक नहीं बनी है. बरसों से यहां तालाब में जमा हो चुकी गाद नहीं निकाली गई है.प्रतिवर्ष प्रतिमाओं के विसर्जन से मिट्टी की परते जमा हो चुकी है, गहरा किए जाने से तालाब में बारिश का पानी जमा होगा, वेकोलि द्वारा भूगर्म से निकला पानी फेंक दिए जाने से यहां उसे भी जमा किया सकेंगा. स्वास्थ्य भारत अभियान के रूप में चंद्रपुर स्थित रामाला तालाब को एक नई पहचान मिल सकती है.